केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में ब्लूटूथ-आधारित मैसेजिंग ऐप BitChat को बैन करने के मामले में केंद्र सरकार, Apple और Google से स्पष्टीकरण मांगा है। यह मामला डीसेंट्रलाइज्ड कम्युनिकेशन टूल्स और सरकारी नियमों के बीच चल रहे कानूनी टकराव को दर्शाता है, जिसकी अगली सुनवाई **11 नवंबर, 2026** को तय की गई है।
अदालत का कड़ा रुख
केरल हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसका नेतृत्व चीफ जस्टिस सौमेन सेन और जस्टिस श्याम कुमार वी एम कर रहे हैं, ने गृह मंत्रालय, सूचना और प्रसारण मंत्रालय, और इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने अक्टूबर में डिजिटल स्टोर्स से BitChat को हटाए जाने के पीछे के ठोस कारणों का ब्यौरा मांगा है।
Apple और Google की भूमिका
Apple और Google, जिन्होंने अक्टूबर में अपने भारतीय ऐप स्टोर्स से इस ऐप को हटाया था, उन्हें भी पक्षकार बनाया गया है। इन कंपनियों का कहना है कि यह कार्रवाई 'इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट' के तहत सरकारी आदेशों के पालन में की गई थी। अब इन टेक दिग्गजों को हलफनामा (Affidavit) दाखिल करना होगा, जिसमें ऐप हटाने के तकनीकी और कानूनी आधारों की जानकारी दी जाएगी।
निवेशकों के लिए क्यों जरूरी है यह मामला?
यह केस इस बात की परीक्षा है कि डीसेंट्रलाइज्ड और ऑफलाइन कम्युनिकेशन टूल्स कैसे राष्ट्रीय सुरक्षा के दायरे में आते हैं। साल 2026 के मध्य में दिल्ली में इंटरनेट अस्थिरता के दौरान BitChat का उपयोग काफी बढ़ा था क्योंकि यह किसी भी पारंपरिक नेटवर्क सेवा प्रदाता पर निर्भर नहीं है।
निवेशकों को इस मामले पर नजर रखनी चाहिए क्योंकि यह आने वाले समय में टेक प्लेटफॉर्म्स के लिए एक मिसाल बन सकता है। यदि कोर्ट सरकार से बैन के लिए अधिक कड़े तर्क मांगती है, तो भविष्य में सरकार द्वारा ऐप हटाने के आदेशों को लागू करने के तौर-तरीकों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। अगली सुनवाई 11 नवंबर, 2026 को होगी, जहां यह तय होगा कि न्यायपालिका सरकार की सुरक्षा संबंधी चिंताओं को प्राथमिकता देती है या डिजिटल कम्युनिकेशन की स्वतंत्रता को।
