भारत का ड्रोन मार्केट साल 2030 तक ₹5.2 लाख करोड़ का होने का अनुमान है। इस तेजी से इलेक्ट्रॉनिक्स और डिफेंस कंपोनेंट्स बनाने वाली कंपनियों के लिए नए अवसर खुल रहे हैं। ड्रोन बनाने वाली कंपनियों के अलावा, Kaynes Technology, Cyient DLM और Centum Electronics जैसी फर्म्स जरूरी हार्डवेयर और इंटेलिजेंस सिस्टम सप्लाई करने के लिए तैयार हैं। निवेशक अब भारत के एयरोस्पेस और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अप्रत्यक्ष तौर पर हिस्सेदारी के लिए इन सप्लायर्स पर दांव लगा रहे हैं।
भारत का बढ़ता ड्रोन मार्केट
भारत अपने एयरोस्पेस और डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दे रहा है, जिसके चलते इंडस्ट्रियल सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अनुमान है कि 2030 तक भारत का ड्रोन मार्केट ₹5.2 लाख करोड़ का हो जाएगा। अब फोकस सिर्फ ड्रोन असेंबली से हटकर उन एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स पर जा रहा है, जो इन अनमैन्ड एरियल व्हीकल्स (UAVs) को पावर देते हैं। असल में, ड्रोन्स उड़ने वाले इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म्स होते हैं, जिन्हें प्रभावी ढंग से काम करने के लिए हाई-टेक सेंसर्स, कम्युनिकेशन मॉड्यूल और पावर मैनेजमेंट सिस्टम की जरूरत होती है।
एयरोस्पेस में इलेक्ट्रॉनिक्स स्पेशलिस्ट्स का उभार
ऐसी कंपनियां जो जरूरी कंपोनेंट्स सप्लाई करती हैं, वे अक्सर किसी एक मैन्युफैक्चरर की सफलता से ज्यादा, पूरे इंडस्ट्री की ग्रोथ से फायदा उठाती हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) और स्पेशलाइज्ड डिफेंस सबसिस्टम्स पर फोकस करके, ये फर्म्स एक साथ कई ड्रोन प्रोड्यूसर्स को सपोर्ट कर सकती हैं। इन्वेस्टर्स के लिए एयरोस्पेस और डिफेंस वैल्यू चेन का विश्लेषण करते समय यह डाइवर्सिफिकेशन एक महत्वपूर्ण थीम बन गया है।
Kaynes Technology: EMS में स्केल बढ़ाना
Kaynes Technology ने इंडस्ट्रियल, एयरोस्पेस और डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में अपनी मजबूत पकड़ बनाई है। कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) में ₹3,626 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, जो लगातार ग्रोथ को दर्शाता है। ₹8,366 करोड़ के ऑर्डर बुक के साथ, कंपनी के पास रेवेन्यू की अच्छी विजिबिलिटी है। प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCBs) और कॉम्प्लेक्स इलेक्ट्रॉनिक असेंबली बनाने की इसकी क्षमता ड्रोन मैन्युफैक्चरर्स की हाई-प्रिसिजन जरूरतों के लिए सीधी तौर पर प्रासंगिक है। निवेशकों के लिए, कंपनी की प्रोडक्शन को स्केल करने और बढ़ते ऑर्डर बुक को मैनेज करने की क्षमता भविष्य के प्रदर्शन का मुख्य संकेतक बनी हुई है।
Cyient DLM और Centum Electronics: डिफेंस पर फोकस
Cyient DLM की एयरोस्पेस और डिफेंस सेक्टर में गहरी जड़ें हैं, जो वर्तमान में इसके रेवेन्यू का लगभग 60% हिस्सा है। FY26 में, कंपनी ने ₹1,261 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया। हाई-रिलायबिलिटी सिस्टम्स के लिए कड़े क्वालिटी स्टैंडर्ड्स को पूरा करने का इसका इतिहास इसे उभरते ड्रोन उद्योग के लिए एक स्वाभाविक पार्टनर बनाता है। इसी तरह, Centum Electronics मिशन-क्रिटिकल सबसिस्टम्स और सेंसर्स में माहिर है। कंपनी ने हाई-वैल्यू वाले प्रोडक्ट्स की ओर अपना पोर्टफोलियो शिफ्ट किया है, जिनमें महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग कंटेंट होता है, जिससे ऑपरेटिंग मार्जिन में सुधार हुआ है। एंटी-ड्रोन टेक्नोलॉजी और ऑटोनॉमस प्लेटफॉर्म्स में Centum की भागीदारी इसे मार्केट के इंटेलिजेंस-हैवी सेगमेंट में रखती है।
सेक्टर कॉन्टेक्स्ट और इन्वेस्टर्स के लिए देखने योग्य बातें
इन कंपनियों की ग्रोथ 'मेक इन इंडिया' जैसे सरकारी इनिशिएटिव्स और डिफेंस पर बढ़ते खर्च से जुड़ी है। हालांकि, इस सेक्टर में जोखिम भी हैं। इन्वेस्टर्स को बड़े ऑर्डर बुक के एग्जीक्यूशन और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग स्पेस में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच मार्जिन बनाए रखने की फर्म्स की क्षमता पर नजर रखनी चाहिए। इसके अलावा, ड्रोन्स में स्वदेशी कंटेंट (Indigenous Content) की ओर ट्रांजीशन रेवेन्यू ग्रोथ के लिए एक महत्वपूर्ण ड्राइवर होगा। आने वाली तिमाहियों में इन कंपनियों के लिए मुख्यmonitorables, ड्रोन मैन्युफैक्चरर्स के साथ लॉन्ग-टर्म सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट्स हासिल करने में उनकी सफलता और अपनी इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटीज को स्केल करते हुए कैपिटल स्पेंडिंग को नियंत्रण में रखने की उनकी क्षमता होगी।
