कर्नाटक सरकार ने 2035 तक **$20 बिलियन** की क्वांटम इकोनॉमी बनाने का लक्ष्य रखा है। इस मिशन के लिए **₹1,000 करोड़** का फंड आवंटित किया गया है, जिसका उद्देश्य बेंगलुरु को डीप-टेक और क्वांटम कंप्यूटिंग का ग्लोबल हब बनाना है।
बड़ा निवेश और भविष्य की राह
कर्नाटक सरकार ने क्वांटम कंप्यूटिंग के क्षेत्र में अपनी धाक जमाने के लिए कमर कस ली है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य केवल रिसर्च तक सीमित रहना नहीं है, बल्कि एकेडमिक लैब्स से निकलकर मार्केट-रेडी प्रोडक्ट्स बनाना है। इसके लिए ₹1,000 करोड़ का 'कर्नाटक क्वांटम मिशन' लॉन्च किया गया है, जो हार्डवेयर डेवलपमेंट और टैलेंट पूल तैयार करने पर फोकस करेगा।
ग्लोबल हब बनाने की तैयारी
राज्य सरकार का फोकस 2027 में होने वाले 'Quantum India Bengaluru Summit' को एक बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच के रूप में स्थापित करने पर है। सरकार चाहती है कि क्वांटम कंप्यूटिंग, सेंसिंग और सिक्योर कम्युनिकेशन जैसे डीप-टेक क्षेत्रों में भारत अपनी पहचान बनाए। QNu Labs जैसे स्टार्टअप्स को इस मुहिम में मुख्य भागीदार माना जा रहा है, जिन्हें ग्लोबल लेवल पर मुकाबला करने के लिए विशेष सरकारी सहायता दी जाएगी।
निवेशकों के लिए जोखिम और अवसर
इन्वेस्टर्स के लिए यह एक 'लॉन्ग-टर्म बेट' है। क्वांटम टेक्नोलॉजी एक हाई-रिस्क और लॉन्ग-जेस्टेशन वाला सेक्टर है, जहां रातों-रात मुनाफा मिलना मुश्किल है। अमेरिका, चीन और यूरोप जैसे ग्लोबल प्लेयर्स से कड़ी टक्कर मिलना तय है। निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि कैसे राज्य सरकार इस मिशन के फंड्स को डिप्लॉय करती है और कितनी तेजी से रिसर्च को कमर्शियल सफलता (Commercial Viability) में बदला जाता है। प्रोजेक्ट में देरी या कॉस्ट ओवररन जैसे रिस्क भी इस सफर का हिस्सा हो सकते हैं।
