कर्नाटक सरकार ने एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यूनिवर्सिटी (KAIU) बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए Infosys के को-फाउंडर Kris Gopalakrishnan की अध्यक्षता में एक कंसल्टेशन कमेटी बनाई गई है, जिसका मकसद जेनरेटिव AI और साइबर सिक्योरिटी में टैलेंट पाइपलाइन तैयार करना है।
एजुकेशन में बड़ा बदलाव
कर्नाटक सरकार ने अपने इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट 'कर्नाटक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यूनिवर्सिटी' (KAIU) के लिए पहली बैठक कर ली है। इस कमेटी की अध्यक्षता Infosys के को-फाउंडर Kris Gopalakrishnan कर रहे हैं और उनके साथ IT विभाग की सेक्रेटरी N Manjula को-चेयरपर्सन के रूप में मौजूद हैं। सरकार का फोकस अब लंबी इमारतों के इंतजार के बजाय, मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल कर तुरंत स्किल्स ट्रेनिंग शुरू करने पर है।
क्या है मास्टर प्लान?
प्रशासन फिजिकल कैंपस बनने का इंतजार नहीं करेगा, बल्कि राज्य भर में मौजूद ट्रेनिंग सेंटर्स को जोड़कर जेनरेटिव AI, क्लाउड कंप्यूटिंग और साइबर सिक्योरिटी जैसे कोर्सेज शुरू किए जाएंगे। इस कदम से IT कंपनियों को सीधे 'रेडी-टू-वर्क' प्रोफेशनल मिल सकेंगे, जिससे हायरिंग और वेज कॉस्ट (Wage Cost) को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकेगा। यह कर्नाटक के IT इकोसिस्टम को लॉन्ग-टर्म सपोर्ट देने की दिशा में एक बड़ा बदलाव है।
निवेशकों के लिए क्यों है यह जरूरी?
बेंगलुरु देश का सबसे बड़ा IT हब है और ऐसी ट्रेनिंग पाइपलाइन कंपनियों की एग्जीक्यूशन क्षमता को बढ़ा सकती है। हालांकि, इसे जमीन पर उतारने में चुनौतियां भी हैं। प्राइवेट सेक्टर, सरकारी बॉडीज और यूनिवर्सिटीज के बीच तालमेल बिठाना और बदलती AI टेक्नोलॉजी के साथ करिकुलम को अपडेट रखना सबसे बड़ी चुनौती होगी। निवेशक अब इस बात पर नजर रखेंगे कि सरकार का यह मॉडल कितनी जल्दी और प्रभावी ढंग से काम करना शुरू करता है और इसका विस्तार बेंगलुरु से बाहर ग्रामीण इलाकों में कैसे होता है।
