कर्नाटक सरकार ने **₹1,300.45 करोड़** की सस्टेनेबल डेटा सेंटर पॉलिसी को मंजूरी दी है। इस योजना का लक्ष्य **2031** तक **1 GW** क्षमता के ग्रीन डेटा सेंटर तैयार करना और मैंगलोर (Mangaluru) को एक बड़े टेक हब के रूप में विकसित करना है।
कर्नाटक सरकार ने 'सस्टेनेबल डेटा सेंटर पॉलिसी 2026-31' को मंजूरी दे दी है। इस पॉलिसी का मुख्य उद्देश्य भारत की एआई-रेडी (AI-ready) डेटा सेंटर क्षमता में 12% हिस्सेदारी हासिल करना है। सरकार का पूरा ध्यान अब रिन्यूएबल एनर्जी और सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए क्लाउड कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने पर है।\n\n### कंपनियों को मिलेंगे बड़े इंसेंटिव्स\n\nनिवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकार ने कई वित्तीय प्रोत्साहन (financial incentives) पेश किए हैं। इसमें ऊर्जा दक्षता (energy efficiency) मानकों को पूरा करने वाली कंपनियों को कैपिटल सब्सिडी और बिजली की खपत पर व्हीलिंग चार्जेस की भरपाई शामिल है। ये उपाय डेटा सेंटर बिजनेस की भारी लागत को कम करने में मदद करेंगे, जिससे कंपनियों के मुनाफे और रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (ROI) में सुधार की उम्मीद है।\n\n### मैंगलोर बनेगा नया टेक डेस्टिनेशन\n\nबेंगलुरु पर दबाव कम करने के लिए सरकार ने मैंगलोर को दूसरे विकास केंद्र के रूप में चुना है। मैंगलोर में सबमरीन केबल लैंडिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे, जो हाई-स्पीड कनेक्टिविटी के लिए बेहद जरूरी हैं। इस कदम से डेटा लेटेंसी (latency) कम होगी, जिसका सीधा फायदा 5जी और IoT जैसी तकनीकों को मिलेगा।\n\n### चुनौतियां और भविष्य की राह\n\nइस प्रोजेक्ट की सफलता जमीन अधिग्रहण की गति, बिजली ग्रिड की मजबूती और वैश्विक क्लाउड खिलाड़ियों की मांग पर निर्भर करेगी। साथ ही, रियल एस्टेट की ऊंची लागत और अन्य राज्यों से मिलने वाली कड़ी प्रतिस्पर्धा डेटा सेंटर ऑपरेटरों के लिए एक बड़ा मॉनिटरेबल फैक्टर बनी रहेगी।
