सरकारी कामकाज में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बोलबाला होगा। Karmayogi Bharat ने OpenAI के साथ हाथ मिलाया है, जिसके तहत देश के **1.7 करोड़** से ज्यादा सरकारी कर्मचारियों को AI टूल्स का इस्तेमाल करने की ट्रेनिंग दी जाएगी।
भारत सरकार के 'मिशन कर्मयोगी' के तहत काम करने वाली संस्था, Karmayogi Bharat ने अब डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में एक बड़ी छलांग लगाई है। OpenAI के साथ इस स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का मुख्य मकसद iGOT Karmayogi प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले सरकारी अफसरों को नई तकनीकों में माहिर बनाना है।
कैसे बदलेगा सरकारी कामकाज?
इस ट्रेनिंग प्रोग्राम का फोकस किताबी ज्ञान से कहीं ज्यादा प्रैक्टिकल स्किल्स पर है। सरकारी कर्मचारी सीखेंगे कि कैसे जेनरेटिव AI (Generative AI) का इस्तेमाल करके रोजमर्रा के प्रशासनिक कामों को आसान बनाया जाए, फाइलों के मैनेजमेंट को सुधारा जाए और आम नागरिकों को दी जाने वाली सेवाओं को और भी तेज और प्रभावी बनाया जाए।
ट्रेनिंग की खासियतें:
- व्यापक पहुंच: इस प्रोग्राम के तहत केंद्र और राज्य सरकारों के 1.7 करोड़ से ज्यादा कर्मचारी ट्रेनिंग ले सकेंगे।
- फ्लेक्सिबिलिटी: ट्रेनिंग मटेरियल सभी तरह के डिवाइसेस पर उपलब्ध होगा ताकि कर्मचारी अपनी सुविधा के हिसाब से सीख सकें।
- सिस्टम में सुधार: ट्रेनिंग का लक्ष्य रूटीन प्रशासनिक कार्यों को ऑटोमेट करना है ताकि काम में लगने वाला समय कम हो और सरकारी मशीनरी की कार्यक्षमता बढ़े।
Karmayogi Bharat इस पूरे प्रोग्राम के लॉजिस्टिक्स और को-ऑर्डिनेशन को संभालेगी, जबकि OpenAI अपना तकनीकी एक्सपर्टाइज और करिकुलम मुहैया कराएगी। जानकारों का मानना है कि इस पहल का असली इम्पेक्ट तब दिखेगा जब सरकारी विभागों में जमीनी स्तर पर इन टूल्स को अपनाकर खर्चों में कमी आएगी और सेवा की गुणवत्ता में सुधार होगा। हालांकि, इतने बड़े पैमाने पर AI का इस्तेमाल शुरू होने के साथ ही सरकारी डेटा की सुरक्षा और प्राइवेसी पर भी खास नजर बनी रहेगी।
