Just Dial का बड़ा दांव: अब SaaS मॉडल से मर्चेंट ग्रोथ बढ़ाने की तैयारी

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Just Dial का बड़ा दांव: अब SaaS मॉडल से मर्चेंट ग्रोथ बढ़ाने की तैयारी

Just Dial ने अपने ट्रेडिशनल डायरेक्टरी बिजनेस को छोड़कर अब सॉफ्टवेयर-एज-ए-सर्विस (SaaS) मॉडल की ओर रुख किया है। कंपनी छोटे व्यवसायों के लिए नए टूल्स पेश कर रही है ताकि मर्चेंट बेस को बढ़ाया जा सके और रेवेन्यू में आ रही सुस्ती को दूर किया जा सके।

बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव

CEO दिनकर अय्यालावरपु के नेतृत्व में Just Dial अब सिर्फ एक पुरानी डायरेक्टरी सर्विस बनकर नहीं रहना चाहता। कंपनी का फोकस अब SMBs (छोटे और मध्यम व्यवसायों) को ऐसे सॉफ्टवेयर टूल्स देने पर है, जिनसे वे अपनी रोजमर्रा की ऑपरेशंस जैसे इन्वेंट्री मैनेजमेंट, बिलिंग और शेड्यूलिंग को मैनेज कर सकें। इस बदलाव का मकसद प्लेटफॉर्म को सिर्फ एक विज्ञापन स्पेस से हटाकर एक जरूरी 'बिजनेस यूटिलिटी' बनाना है।

मर्चेंट को जोड़ने की नई रणनीति

कंपनी अब सोलर पैनल इंस्टॉलर, पेस्ट कंट्रोल और लॉजिस्टिक्स जैसे स्पेसिफिक सेक्टर्स को टारगेट कर रही है। मैनेजमेंट का मानना है कि इन टूल्स को जोड़ने से मर्चेंट्स का प्लेटफॉर्म पर जुड़ाव बढ़ेगा। यह मॉडल ई-कॉमर्स कंपनियों के भारी-भरकम इंफ्रास्ट्रक्चर से दूर रहने में मदद करेगा, जिससे कंपनी अपने डेटा एग्रीगेशन के मूल काम पर फोकस कर सकेगी।

कमाई की चुनौती और कॉम्पिटिशन

Just Dial के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने 5.74 करोड़ फ्री लिस्टिंग्स को पेड सब्सक्राइबर्स में बदलना है। कंपनी का प्रति यूजर औसत रेवेन्यू लगभग ₹4,825 के आसपास काफी समय से स्थिर बना हुआ है। हालांकि कंपनी को Reliance Retail और Jio Platforms का मजबूत बैकअप हासिल है, लेकिन कैटेगरी-फोकस्ड मोबाइल ऐप्स से मिल रही तगड़ी टक्कर एक बड़ा रिस्क है। अब देखना यह होगा कि क्या यह सॉफ्टवेयर-सेंट्रिक बदलाव निवेशकों की उम्मीदों पर खरा उतर पाएगा और ग्रोथ को नई दिशा दे पाएगा या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.