Reliance Retail अब अपने **3,100** से ज़्यादा फिजिकल स्टोर्स को क्विक-कॉमर्स हब में बदल रहा है, ताकि Blinkit और Zepto जैसे अपने राइवल्स को कड़ी टक्कर दे सके। हाल ही में JioMart ने **20 लाख** रोज़ाना ऑर्डर्स का आंकड़ा पार कर लिया है, लेकिन इस आक्रामक निवेश का असर कंपनी के प्रदर्शन पर पड़ा है। जून तिमाही में नेट प्रॉफिट में **14%** की गिरावट दर्ज की गई है। निवेशक इस बात पर नज़र रखे हुए हैं कि क्या यह हाइब्रिड मॉडल तेजी से विस्तार और मुनाफे के बीच संतुलन बना पाएगा।
Reliance Retail का क्विक-कॉमर्स में बड़ा दांव
Reliance Retail क्विक-कॉमर्स सेक्टर में अपनी मौजूदगी तेजी से बढ़ा रही है। कंपनी अब सिर्फ वेयरहाउस पर निर्भर रहने के बजाय, अपने 3,100 से ज़्यादा Reliance Smart और Reliance Fresh स्टोर्स के साथ-साथ 600 डार्क स्टोर्स का इस्तेमाल करके 30 मिनट के अंदर डिलीवरी पूरी कर रही है। इस कदम से JioMart अब 1,200 शहरों और 5,500 से ज़्यादा पिन कोड में Blinkit और Zepto जैसे बड़े खिलाड़ियों को सीधी टक्कर देगा।
हाइब्रिड मॉडल: स्टोर्स बनेंगे डिलीवरी सेंटर
Reliance की रणनीति का मुख्य आधार एक हाइब्रिड मॉडल है, जिसमें फिजिकल स्टोर्स ही डिलीवरी सेंटर की तरह काम करेंगे। अपने नज़दीकी स्टोर्स से सीधे ऑनलाइन ऑर्डर्स की डिलीवरी करके, कंपनी इन्वेंट्री और पहुंच को बेहतर बनाना चाहती है। यह तरीका उन क्विक-कॉमर्स कंपनियों से अलग है जो शुरू से ही खास इंफ्रास्ट्रक्चर बनाती हैं। इस वजह से ब्रांड्स को भी अपनी रणनीति बदलनी पड़ रही है। Gopal Snacks और Milky Mist जैसी कंपनियां बड़े, प्लान किए गए घरेलू सामानों के लिए JioMart का इस्तेमाल कर रही हैं, जबकि छोटी, तुरंत की ज़रूरत वाली चीजों के लिए वे दूसरे क्विक-कॉमर्स ऐप्स का सहारा ले रही हैं।
मुनाफे पर असर, विस्तार की भारी लागत
क्विक-कॉमर्स के इस अत्यधिक प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में तेजी से उतरने के कारण कंपनी को भारी पूंजी खर्च करनी पड़ी है, जिसका सीधा असर उसके बॉटम लाइन पर दिखा है। जून तिमाही (Q1 FY27) में Reliance Retail का नेट प्रॉफिट पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 14% घटकर ₹2,806 करोड़ रह गया। मैनेजमेंट ने इस परफॉर्मेंस का कारण JioMart के लिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्राहक अधिग्रहण पर किया गया भारी खर्च बताया है। कंपनी का लक्ष्य है कि ऑनलाइन कॉमर्स भविष्य में उसके कुल रेवेन्यू का 20% से ज़्यादा हो, लेकिन फिलहाल निवेशक इस बात पर ध्यान दे रहे हैं कि क्या यह खर्च स्थायी और मुनाफे वाले विकास में तब्दील हो पाएगा।
एग्जीक्यूशन और मार्केट रिस्क
JioMart की सफलता अब इस बात पर निर्भर करती है कि कंपनी प्रति स्टोर ऑर्डर डेंसिटी (ऑर्डर्स की संख्या) को लागत बढ़ाए बिना कैसे सुधारती है, और साथ ही फिजिकल ग्राहकों के अनुभव में कोई बाधा न आए। डिजिटल डिलीवरी को सामान्य रिटेल माहौल में इंटीग्रेट करना एक बड़ी ऑपरेशनल चुनौती है। Reliance Industries, जिसका शेयर प्राइस लगभग ₹1,326 पर ट्रेड कर रहा है, ने संकेत दिया है कि फिलहाल उनका ध्यान स्केल बनाने पर है। जैसे-जैसे कंपनी बाजार हिस्सेदारी हासिल करने के लिए खर्च कर रही है, अगले कुछ तिमाहियों में ऑपरेटिंग मार्जिन के ट्रेंड और इन स्टोर्स की कोर रिटेल बिक्री को प्रभावित किए बिना बढ़े हुए ऑपरेशनल लोड को संभालने की उनकी क्षमता पर नज़र रहेगी। कंपनी अपने तीन साल के उस लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है जिसमें वह ऑपरेटिंग EBITDA को दोगुना करना चाहती है, और JioMart इस यात्रा का एक अहम हिस्सा है।
