Jio Platforms अब अपनी वायरलेस ब्रॉडबैंड टेक्नोलॉजी को ग्लोबल मार्केट में ले जाने की तैयारी में है। कंपनी अमेरिका की दिग्गज टेलिकॉम कंपनियों Comcast और Charter Communications के साथ बातचीत कर रही है, ताकि अपनी तकनीक के बदले में उनमें हिस्सेदारी (Equity) हासिल कर सके।
ग्लोबल मार्केट में बड़ी एंट्री की कोशिश
Jio Platforms अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहना चाहती। कंपनी अपनी होम-ग्रोन वायरलेस ब्रॉडबैंड टेक्नोलॉजी को एक्सपोर्ट करने के लिए 'टेक-फॉर-इक्विटी' (Tech-for-Equity) मॉडल अपना रही है। इस मॉडल के तहत, कंपनी अपनी Unlicensed Band Radio (UBR) और सॉफ्टवेयर स्टैक को इन विदेशी कंपनियों को लाइसेंस देगी और इसके बदले में वहां माइनॉरिटी इक्विटी स्टेक (हिस्सेदारी) हासिल करेगी।
यह तकनीक बिना महंगे फाइबर केबल बिछाए, अनलाइसेंस्ड वाई-फाई फ्रीक्वेंसी के जरिए हाई-स्पीड इंटरनेट प्रदान करने में सक्षम है। कंपनी का लक्ष्य दुनिया भर में 10 से 15 ऐसी पार्टनरशिप करना है, जिससे वह अपने भारतीय विकास मॉडल को ग्लोबल स्तर पर दोहरा सके।
पिछले समझौतों से मिली सीख
हालांकि यह योजना सुनने में बड़ी है, लेकिन राह आसान नहीं है। हाल ही में दक्षिण अफ्रीका की MTN Group के साथ कंपनी की बातचीत बेनतीजा रही। वहां डील न हो पाने की मुख्य वजह वैल्यूएशन और लाइसेंसिंग एग्रीमेंट की शर्तें थीं। यह मामला बताता है कि टेक-फॉर-इक्विटी मॉडल में विदेशी ऑपरेटरों की रिस्क-अवर्ट (जोखिम कम लेने वाली) उम्मीदों के साथ तालमेल बिठाना काफी चुनौतीपूर्ण है।
IPO के बाद मार्केट का मूड
यह कदम कंपनी के लिए एक बड़े माइलस्टोन के बाद उठाया गया है। Jio Platforms ने हाल ही में $3.2 बिलियन का सफल IPO लाया था और 28 अक्टूबर, 2026 को कंपनी के शेयर 21.36% के प्रीमियम के साथ लिस्ट हुए थे।
अब निवेशक इस बात पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं कि कंपनी खुद को एक साधारण टेलिकॉम ऑपरेटर की तरह पेश करेगी या एक हाई-ग्रोथ टेक्नोलॉजी फर्म की तरह। ग्लोबल डील का फाइनल होना कंपनी की वैल्यूएशन को और मजबूती दे सकता है, जबकि धीमी प्रगति निवेशकों के बीच कंपनी के मौजूदा वैल्यूएशन को लेकर सवाल उठा सकती है। अब देखना होगा कि मैनेजमेंट इन अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों को कैसे पार करता है।
