जापान में AI-संचालित साइबर हमलों में भारी बढ़ोतरी के बाद सरकार सख्त हो गई है। GMO Internet Group से **$50 मिलियन** की फिरौती मांगने की घटना के बाद अब नई इमरजेंसी साइबर सिक्योरिटी पॉलिसी तैयार की जा रही है।
जापान सरकार अब निजी क्षेत्र पर हो रहे सोफिस्टिकेटेड साइबर हमलों को रोकने के लिए एक इमरजेंसी साइबर सिक्योरिटी पॉलिसी पर तेजी से काम कर रही है। प्रधानमंत्री सनाए तकाइची (Sanae Takaichi) ने कॉर्पोरेट नेटवर्क में मौजूद कमजोरियों को दूर करने के लिए कैबिनेट स्तर पर निर्देश जारी किए हैं। यह लेजिस्लेटिव कदम जापान की नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और डिजिटल खतरों से निपटने के लिए उठाया गया है।
AI टूल्स और सुरक्षा का खतरा
इस नई नीति के पीछे 'Artex' नामक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल का गलत इस्तेमाल एक बड़ी चिंता है। हालांकि इसे सिस्टम की खामियां खोजने के लिए बनाया गया था, लेकिन हैकर्स अब इसका इस्तेमाल नेटवर्क में सेंध लगाने के लिए कर रहे हैं। यह जनरेटिव AI के बढ़ते खतरों को दर्शाता है, जिसने दुनिया भर की कंपनियों के लिए अपनी सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत करना अनिवार्य बना दिया है।
कॉर्पोरेट्स पर वित्तीय दबाव
इन हमलों का असर अब बड़ी आईटी कंपनियों पर साफ दिखने लगा है। जापान की प्रमुख टेक कंपनी GMO Internet Group ने पुष्टि की है कि उसे हाल ही में एक बड़ी एक्सटॉर्शन (Extortion) कोशिश का निशाना बनाया गया। कंपनी के फाउंडर और सीईओ मसातोशी कुमागाई (Masatoshi Kumagai) ने बताया कि हमलावरों ने उनके सिस्टम का एक्सेस पाने के बाद $50 मिलियन की डिमांड की थी।
इन्वेस्टर्स के लिए यह घटना साइबर सुरक्षा पर होने वाले बढ़ते खर्च की एक चेतावनी है। जैसे-जैसे बिजनेस प्रोसेस डिजिटल हो रहे हैं, डेटा लीक और ऑपरेशनल डिसरप्शन का खतरा भी बढ़ गया है। अब बाजार के जानकार इस बात पर नजर रख रहे हैं कि क्या इन नई सरकारी नीतियों के कारण टेक सेक्टर में साइबर सिक्योरिटी इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च और बढ़ेगा, और ग्लोबल कंपनियां इन AI-आधारित खतरों का मुकाबला कैसे करेंगी।
