इटली की कॉम्पिटिशन अथॉरिटी ने Microsoft और उसकी सहायक कंपनी Activision Blizzard के खिलाफ जांच शुरू की है। मामला इन-गेम वर्चुअल करेंसी की पारदर्शिता से जुड़ा है, जिस पर रेगुलेटर्स को शक है कि यह ग्राहकों, खासकर नाबालिगों को गुमराह कर रही है।
रेगुलेटर्स का क्या है आरोप?
8 अक्टूबर 2026 को इटली की कॉम्पिटिशन अथॉरिटी (AGCM) ने Microsoft के गेमिंग कारोबार की औपचारिक जांच शुरू की है। रेगुलेटर्स का मानना है कि गेमिंग के दौरान इस्तेमाल होने वाली वर्चुअल करेंसी और उनकी जटिल प्राइसिंग स्ट्रक्चर आम यूजर के लिए समझना मुश्किल है। अक्सर इन करेंसीज का इस्तेमाल कॉस्मेटिक अपग्रेड्स खरीदने के लिए किया जाता है, लेकिन इसकी लेयर्ड कन्वर्जन प्रक्रिया असली खर्च को छुपाती है, जो पारदर्शिता के मानकों के खिलाफ हो सकती है।
नाबालिगों पर विशेष नजर
जांच का एक मुख्य हिस्सा यह है कि ये मोनेटाइजेशन डिजाइन नाबालिगों को कैसे प्रभावित करते हैं। अधिकारियों का तर्क है कि ये सिस्टम बच्चों को खर्च करने के लिए प्रेरित करते हैं क्योंकि उन्हें असल दुनिया की कीमत का सही अंदाजा नहीं हो पाता।
यूरोपियन नेटवर्क का दबाव
यह जांच केवल इटली तक सीमित नहीं है। यह कदम नॉर्वे और डेनमार्क के रेगुलेटर्स के साथ मिलकर, यूरोपियन यूनियन के 'कंज्यूमर प्रोटेक्शन कोऑपरेशन (CPC) नेटवर्क' के तहत उठाया गया है। इससे जांच का दायरा काफी बढ़ गया है।
निवेशकों के लिए क्या है जोखिम?
Microsoft पहले ही यूरोप में कई रेगुलेटरी चुनौतियों का सामना कर रही है, जिसमें Microsoft 365 की प्राइसिंग और AI इंटीग्रेशन जैसे मामले शामिल हैं। हालांकि अभी कंपनी के शेयर प्राइस पर इसका कोई बड़ा असर नहीं दिखा है, लेकिन अगर जांच में कंपनी दोषी पाई जाती है, तो उसे भारी जुर्माना देना पड़ सकता है। इसके अलावा, कंपनी को अपने गेमिंग इकोसिस्टम में रेवेन्यू मॉडल और प्राइसिंग दिखाने के तरीके को पूरी तरह बदलना पड़ सकता है, जिसका असर भविष्य की कमाई पर पड़ सकता है।
