इजरायल के Weizmann Institute of Science ने 'Brain-IT' नाम का एक AI सिस्टम बनाया है जो दिमाग की गतिविधियों से तस्वीरें बना सकता है। निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे इसे भारतीय लिस्टेड कंपनी Weizmann Ltd से न जोड़ें, क्योंकि दोनों का आपस में कोई लेना-देना नहीं है।
इजरायल के Weizmann Institute of Science के रिसर्चर्स ने 'Brain-IT' नाम का एक क्रांतिकारी AI सिस्टम पेश किया है। यह टेक्नोलॉजी इंसानी दिमाग की गतिविधियों को एनालाइज करके विजुअल इमेज को फिर से तैयार कर सकती है। इसे हाल ही में International Conference on Learning Representations (ICLR) 2026 में प्रस्तुत किया गया था, जो fMRI स्कैन डेटा का उपयोग करके न्यूरल सिग्नल्स को तस्वीरों में बदल देती है।
कैसे काम करती है यह टेक्नोलॉजी?
Brain-IT सिस्टम इंसानों के बीच कॉमन न्यूरल पैटर्न को पहचानता है। रिसर्चर्स ने दिमाग के स्कैन को 40,000 वोक्सेल्स (3D इमेजिंग की सबसे छोटी यूनिट) में बांटा है और विजुअल प्रोसेसिंग से जुड़े 128 फंक्शनल रीजन्स को मैप किया है। पहले की टेक्नोलॉजी में हर यूजर के लिए लंबी ट्रेनिंग की जरूरत होती थी, लेकिन इस नए मॉडल ने इसे घटाकर सिर्फ 1 घंटे कर दिया है। यह सिस्टम 70,000 तस्वीरों के विशाल डेटासेट पर ट्रेन किया गया है, जिससे यह कलर, शेप और ऑब्जेक्ट्स को आसानी से समझ सकता है।
निवेशकों के लिए स्पष्टीकरण (Clarification for Investors)
भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों के लिए यह समझना बहुत जरूरी है कि 'Weizmann Institute of Science' एक इजरायली यूनिवर्सिटी है, जिसका भारत की लिस्टेड कंपनी 'Weizmann Ltd' से कोई संबंध नहीं है। Weizmann Ltd मुख्य रूप से टेक्सटाइल इंडस्ट्री से जुड़ी है और NSE/BSE पर लिस्टेड है। इस AI डेवलपमेंट का भारतीय कंपनी के कामकाज या फाइनेंशियल्स पर कोई असर नहीं है।
भविष्य की संभावनाएं और सीमाएं
फिलहाल यह टेक्नोलॉजी सिर्फ कंट्रोल लैबोरेटरी एनवायरनमेंट तक सीमित है। यह किसी के निजी विचार या यादें नहीं पढ़ सकती। भविष्य में, टीम इसे उन लोगों के लिए थेरेप्यूटिक टूल के रूप में विकसित करने की सोच रही है जो बोलने में अक्षम हैं। हालांकि, इसके साथ डेटा प्राइवेसी और एथिकल सुरक्षा जैसे सवाल भी जुड़े हुए हैं, जिन पर काम जारी है।
