Discover-Tech पर बड़ी कार्रवाई: Spyware के आरोपों में Google और Comcast ने किया बैन

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AuthorAditya Rao|Published at:
Discover-Tech पर बड़ी कार्रवाई: Spyware के आरोपों में Google और Comcast ने किया बैन

इजरायली विज्ञापन फर्म Discover-Tech पर वैश्विक निगरानी अभियान चलाने के आरोप लगे हैं। Google और Comcast जैसे दिग्गज प्लेटफॉर्म्स ने कंपनी को ब्लॉक कर दिया है, क्योंकि कंपनी पर मालवेयर के जरिए यूजर्स को ट्रैक करने और जासूसी करने का खुलासा हुआ है।

साइबर सुरक्षा जांचकर्ताओं ने एक बड़े निगरानी अभियान का खुलासा किया है, जिसे इजरायली डिजिटल विज्ञापन फर्म Discover-Tech द्वारा संचालित किया जा रहा था। कंपनी पर आरोप है कि उसने ऑनलाइन विज्ञापनों का इस्तेमाल करोड़ों यूजर्स की ट्रैकिंग और जासूसी करने के लिए किया।

कैसे काम करता था 'मैलवर्टाइजिंग' जाल?

Citizen Lab और Confiant के शोधकर्ताओं के अनुसार, कंपनी ने 'मैलवर्टाइजिंग' (Malvertising) नाम की तकनीक का इस्तेमाल किया। इसके तहत साधारण विज्ञापनों में घातक कोड इंजेक्ट किया जाता था, जिससे 1,20,000 से ज्यादा वेबसाइटों और 75,000 मोबाइल ऐप्स पर यूजर्स को ट्रैक किया जाता था। कुकी मैचिंग के जरिए यूजर के साइट छोड़ने के बाद भी निगरानी जारी रहती थी।

रडार पर आईं बड़ी संस्थाएं और कंपनियां

यह केवल व्यक्तिगत निगरानी तक सीमित नहीं था। अमेरिकी पेंटागन, इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी और इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट जैसे संस्थानों के नेटवर्क पर भी इन दुर्भावनापूर्ण विज्ञापनों का पता चला है। इसके अलावा, Nvidia, Broadcom और Micron जैसी टेक कंपनियों और Al Jazeera के डिवाइस भी इससे प्रभावित पाए गए हैं।

Blacklist कनेक्शन और मार्केट पर असर

जांच में Discover-Tech के तार इजरायली कंपनी Candiru से जुड़े मिले हैं, जो मानवाधिकार चिंताओं के कारण पहले से ही अमेरिकी सरकार की ब्लैकलिस्ट में है। Google, Comcast की Beeswax और IAB Europe ने तत्काल प्रभाव से कंपनी के साथ अपने संबंध तोड़ लिए हैं।

निवेशकों के लिए सबक

यह घटना ऑनलाइन विज्ञापन के Real-time Bidding (RTB) इकोसिस्टम में छिपे जोखिमों को उजागर करती है। विज्ञापन सप्लाई चेन की जटिलता के कारण वेंडर्स की सुरक्षा जांच करना मुश्किल हो जाता है। निवेशकों को अब उन कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए जो डेटा प्राइवेसी और फर्स्ट-पार्टी डेटा स्ट्रैटेजी पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं, क्योंकि रेगुलेटरी दबाव बढ़ने से ऐसी कंपनियां लॉन्ग-टर्म में बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.