Invertis University, Google Cloud और Gemini Enterprise के साथ साझेदारी करके भारत का पांचवां Google Agentic AI University बन गया है। इस सहयोग से **10,000** से ज़्यादा छात्रों और कर्मचारियों को जेनेरेटिव AI टूल्स मिलेंगे, जिससे रिसर्च और डिजिटल स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलेगा।
Detailed Coverage
AI तक पहुंची पहुंच और स्किल्स का विस्तार
Invertis University अब Google Cloud और Google Gemini Enterprise के साथ हाथ मिलाकर भारतीय शिक्षण संस्थानों के एक खास समूह में शामिल हो गई है। इस कदम से यूनिवर्सिटी भारत की पांचवीं Google Agentic AI University बन गई है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य 10,000 से अधिक छात्रों और फैकल्टी सदस्यों के रोज़मर्रा के अकादमिक कामों में एंटरप्राइज-ग्रेड जेनेरेटिव AI टूल्स को एकीकृत करना है।
इस साझेदारी के तहत, यूनिवर्सिटी Google Workspace for Education Plus को अपना रही है और Google Gemini Enterprise का एक्सेस दे रही है। इन टूल्स को करिकुलम में शामिल करके, यूनिवर्सिटी छात्रों की एडवांस कोडिंग, डेटा एनालिसिस और क्रिएटिव कंटेंट जेनरेशन में मदद करने का इरादा रखती है। यह कोशिशें ऐसे ग्रेजुएट्स की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए की जा रही हैं, जिन्हें AI की अच्छी समझ हो। यह इंटीग्रेशन इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, फार्मेसी, लॉ और एग्रीकल्चर जैसे कई विषयों में फैला होगा, ताकि पारंपरिक कंप्यूटर साइंस प्रोग्राम से आगे बढ़ा जा सके।
इंफ्रास्ट्रक्चर और सर्टिफिकेशन प्रोग्राम
इस इंटीग्रेशन को सपोर्ट करने के लिए, यूनिवर्सिटी अपने कैंपस में एक खास Google Agentic AI Centre of Excellence स्थापित कर रही है। यह सुविधा स्टार्टअप प्रोजेक्ट्स, हैकाथॉन और इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च के लिए एक इनक्यूबेटर के रूप में काम करेगी। कैंपस-व्यापी टूल्स के अलावा, इस साझेदारी में क्लाउड कंप्यूटिंग, मशीन लर्निंग, साइबर सिक्योरिटी और डेटा एनालिटिक्स पर केंद्रित इंडस्ट्री-फोकस्ड प्रोग्राम्स भी शामिल हैं। इन कोर्सेस को इस तरह डिजाइन किया गया है कि छात्रों को ग्लोबली मान्यता प्राप्त Google Cloud लर्निंग रिसोर्सेज तक पहुंच मिले, जो उनके भविष्य के करियर में एक महत्वपूर्ण अंतर ला सकते हैं।
शिक्षा में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन का संदर्भ
यह साझेदारी एक बढ़ते हुए ट्रेंड का हिस्सा है, जहां भारतीय यूनिवर्सिटीज़ अपने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मॉडर्नाइज करने के लिए ग्लोबल टेक्नोलॉजी कंपनियों के साथ तेज़ी से सहयोग कर रही हैं। जहां इस तरह की पार्टनरशिप से एडवांस सॉफ्टवेयर और ट्रेनिंग रिसोर्सेज तक पहुंच मिलती है, वहीं छात्रों को इसका लंबे समय तक फायदा फैकल्टी ट्रेनिंग की प्रभावशीलता और इन टूल्स के प्रैक्टिकल इस्तेमाल पर निर्भर करता है। एजुकेशन और एड-टेक सेक्टर के इन्वेस्टर्स और स्टेकहोल्डर्स अक्सर ऐसे सहयोगों पर नज़र रखते हैं, क्योंकि ये किसी संस्थान की एम्प्लॉयबिलिटी और मॉडर्न स्किल सेट्स पर फोकस को दर्शाते हैं।
आगे की राह
इस पहल की प्रभावशीलता शायद इस बात से मापी जाएगी कि यूनिवर्सिटी इन AI टूल्स का इस्तेमाल किस हद तक बनाए रखती है और अंततः उसके छात्र टेक-ड्रिवेन जॉब मार्केट में कितनी सफलता हासिल करते हैं। भविष्य के अपडेट्स में शायद नए Google-पावर्ड सर्टिफिकेशन प्रोग्राम को पूरा करने वाले छात्रों के पहले बैच और नए Centre of Excellence के माध्यम से उत्पन्न रिसर्च प्रोजेक्ट्स के नतीजों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
