Infosys ने जनरेटिव AI के बढ़ते दौर में अपने बिजनेस मॉडल को पूरी तरह बदलने का फैसला किया है। कंपनी अब 1,00,000 कर्मचारियों को री-स्किल (re-skill) कर रही है और पुराने हेडकाउंट-आधारित मॉडल की जगह आउटकम-बेस्ड बिलिंग को प्राथमिकता दे रही है ताकि प्रॉफिट मार्जिन सुरक्षित रहे।
बदल रहा है बिजनेस मॉडल
जेनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए Infosys ने अपनी रणनीति में बड़ा फेरबदल किया है। अब तक कंपनी का बिजनेस मॉडल 'हेडकाउंट' यानी काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या पर आधारित था, लेकिन अब कंपनी 'आउटकम-बेस्ड' प्राइसिंग की ओर बढ़ रही है। इसका मतलब यह है कि अब क्लाइंट्स से फीस काम के घंटों के बजाय, डिलीवर किए गए नतीजों और वैल्यू के आधार पर ली जाएगी।
AI से कितनी हो रही है कमाई?
कंपनी के लिए AI सेगमेंट अब एक बड़ा ग्रोथ ड्राइवर बन चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक, AI से जुड़ी रेवेन्यू $1.6 बिलियन के आंकड़े को पार कर गई है, जो कुल रेवेन्यू का लगभग 8% है। कंपनी का 'Topaz Fabric' प्लेटफॉर्म इस सफर में अहम भूमिका निभा रहा है, जिसने अब तक 100 से ज्यादा प्रोजेक्ट्स और 35 एक्टिव इम्प्लीमेंटेशन को सपोर्ट किया है।
वर्कफोर्स में बड़ा बदलाव
इस बड़े बदलाव के लिए कंपनी अपने वर्कफोर्स को तैयार कर रही है। 80,000 से 1,00,000 कर्मचारियों को स्पेशलाइज्ड रोल्स के लिए री-स्किल किया जा रहा है। इसके अलावा, 6,000 इंजीनियरों की एक खास टीम बनाई जा रही है जो नई-जेनरेशन की टेक्नोलॉजी पर काम करेगी। यह ट्रेनिंग प्रोग्राम पहले ही 2,70,000 कर्मचारियों तक पहुंच चुका है।
निवेशकों के लिए संकेत
पूरा इंडियन IT सेक्टर इस समय बदलाव के दौर से गुजर रहा है। हालांकि, यह कदम लंबी अवधि के लिए बेहतर है, लेकिन निवेशकों की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह ट्रांजिशन प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव को कम कर पाएगा। CEO सलिल पारेख और उनकी लीडरशिप टीम अब AI और मानवीय कुशलता के मेल से क्लाइंट्स के साथ गहरे संबंध बनाने पर जोर दे रही है, ताकि कंपनी की मार्केट पोजीशन मजबूत बनी रहे।
