Infosys के CEO Salil Parekh ने एक बड़ा रोडमैप पेश किया है। कंपनी अपनी कुल कमाई का **50%** हिस्सा अगले 3 सालों में AI-ड्रिवन सर्विसेज से जुटाने की तैयारी कर रही है, जो अभी केवल **8%** है। इस आक्रामक रणनीति के बावजूद कंपनी ने बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च और रेगुलेटरी चुनौतियों के प्रति आगाह भी किया है।
बदलती बिजनेस स्ट्रैटेजी
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब इंफोसिस के लिए एक छोटा हिस्सा नहीं, बल्कि मुख्य बिजनेस ड्राइवर बनने जा रहा है। CEO Salil Parekh ने स्पष्ट किया है कि कंपनी अगले 2 से 3 सालों में AI प्रोजेक्ट्स को अपने कुल ऑपरेशंस का आधा हिस्सा बनाने की दिशा में काम कर रही है। हालांकि अभी यह योगदान महज 8% है, लेकिन कंपनी को इस सेगमेंट में हर तिमाही डबल डिजिट की ग्रोथ देखने को मिल रही है।
फाइनेंशियल हेल्थ और मार्जिन
कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए अपनी गाइडेंस को बरकरार रखा है, जिसमें 1.5% से 3.0% की रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान है। ऑपरेटिंग मार्जिन का लक्ष्य 20% से 22% के बीच रखा गया है, जबकि पहली तिमाही में यह 21.1% दर्ज किया गया, जो दर्शाता है कि कंपनी मुनाफे को मैनेज करने में सफल रही है।
वर्कफोर्स और हायरिंग का प्लान
इस लक्ष्य को पाने के लिए कंपनी ने 80,000 कर्मचारियों को AI टूल्स और सिस्टम मॉडर्नाइजेशन के काम में लगा दिया है। इसके अलावा, कंपनी इस साल 20,000 नए फ्रेशर्स को हायर करने की तैयारी में है, जिन्हें जॉइनिंग के साथ ही AI डिप्लॉयमेंट की ट्रेनिंग दी जाएगी।
बिजनेस के सामने चुनौतियां
इस विस्तार के साथ कुछ जोखिम भी जुड़े हैं। मैनेजमेंट का मानना है कि AI चिप्स और डेटा सेंटर के बढ़ते दाम लॉन्ग-टर्म मार्जिन पर दबाव डाल सकते हैं। इसके अलावा, डेटा स्टोरेज से जुड़े सख्त सरकारी नियम (Sovereign Data Storage) कंपनी की क्लाउड कैपेसिटी बढ़ाने में बाधा बन सकते हैं।
आईटी सेक्टर में आज दिखी तेजी के साथ इंफोसिस के शेयरों में भी मजबूती देखी गई। निवेशक अब यह देख रहे हैं कि क्या कंपनी अपनी इस AI स्ट्रैटेजी को क्लाइंट स्पेंडिंग में बदल पाती है, खासकर तब जब कंपनियों का टेक्नोलॉजी बजट सीमित है।
