Semicon India इवेंट में दिग्गज कंपनियों ने सरकार से चिप मैन्युफैक्चरिंग के अलावा इक्विपमेंट और कंपोनेंट बनाने के लिए नई पॉलिसी और इंसेंटिव की मांग की है। Disco Hi-Tec और Advantest जैसी कंपनियों का मानना है कि भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लोकल टूलिंग इकोसिस्टम जरूरी है।
मैन्युफैक्चरिंग का दायरा बढ़ाने पर जोर
भारत का सेमीकंडक्टर सेक्टर अब एक बड़े बदलाव की ओर देख रहा है। अभी तक सरकार का फोकस केवल चिप फैब्रिकेशन (Fabs) पर है, लेकिन इंडस्ट्री लीडर्स का कहना है कि अगर भारत को ग्लोबल हब बनना है, तो हमें उन मशीनों और सब-सिस्टम्स को भी भारत में बनाना होगा, जो चिप बनाने के काम आते हैं।
मौजूदा चुनौतियां और जरूरतें
फिलहाल India Semiconductor Mission (ISM) के तहत फैब और ATMP यूनिट्स को सब्सिडी तो मिल रही है, लेकिन इक्विपमेंट के लिए सप्लाई चेन पूरी तरह इम्पोर्ट पर निर्भर है। इंडस्ट्री की मांग है कि सरकार न केवल सब्सिडी दे, बल्कि पायलट मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी और प्रोटोटाइप डेवलपमेंट प्रोग्राम्स के जरिए रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) में मदद करे।
ग्लोबल कंपनियों का बढ़ रहा भरोसा
बड़ी इंटरनेशनल कंपनियां धीरे-धीरे भारत में अपने पैर पसार रही हैं।
- Disco Hi-Tec: गुजरात की पंडित दीनदयाल एनर्जी यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर ट्रेनिंग सेंटर खोल रही है ताकि स्किल-सेट तैयार हो सके।
- Advantest: बेंगलुरु और चेन्नई में अपने R&D ऑपरेशंस को विस्तार दे रही है। ये कंपनियां भारत के लॉन्ग-टर्म पोटेंशियल पर दांव लगा रही हैं।
निवेशकों के लिए जरूरी बातें
इन्वेस्टर्स को यह ध्यान रखना चाहिए कि इस सेक्टर में एंट्री बैरियर बहुत ज्यादा है। इसमें भारी कैपिटल की जरूरत है और रिसर्च का समय (Gestation Period) भी लंबा है। भविष्य में सरकार अगर इक्विपमेंट सेक्टर के लिए कोई नई स्कीम लाती है, तो यह पूरे सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। फिलहाल, भारत में प्रोटोटाइप से लेकर कमर्शियल प्रोडक्शन तक का सफर तय करना ही सबसे बड़ी चुनौती है।
