India's ₹1 Lakh Crore Deep Tech Push: आईटी सर्विसेज से हार्डवेयर की ओर बड़ा कदम

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
India's ₹1 Lakh Crore Deep Tech Push: आईटी सर्विसेज से हार्डवेयर की ओर बड़ा कदम

भारत अब आईटी सर्विसेज से आगे बढ़कर डीप टेक (Deep Tech) जैसे सेमीकंडक्टर, एयरोस्पेस और रोबोटिक्स पर दांव लगा रहा है। सरकार इसके लिए **₹1 लाख करोड़** का बड़ा फंड लेकर आई है, लेकिन निवेशकों को यह समझना होगा कि हार्डवेयर में आरएंडडी (R&D) और कैपिटल की जरूरत सॉफ्टवेयर सेक्टर से कहीं ज्यादा है।

भारत का टेक्नोलॉजी सेक्टर एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। दशकों तक यह सेक्टर मुख्य रूप से आईटी सर्विसेज और आउटसोर्सिंग पर आधारित था, लेकिन अब फोकस डीप टेक पर शिफ्ट हो गया है। इसमें सेमीकंडक्टर, एडवांस्ड रोबोटिक्स, एयरोस्पेस और वैज्ञानिक उपकरण जैसे क्षेत्र शामिल हैं। 2025 के मध्य में शुरू की गई ₹1 लाख करोड़ की सरकारी योजना का उद्देश्य देश को सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट से आगे ले जाकर हार्डवेयर मैन्युफैक्चरिंग और प्रोडक्ट इनोवेशन में ग्लोबल लीडर बनाना है।

निवेशकों के लिए बिजनेस मॉडल में बदलाव

आईटी सर्विसेज कंपनियों में कैश फ्लो का अंदाजा आसानी से लग जाता है, क्योंकि वे ह्यूमन कैपिटल पर निर्भर होती हैं। वहीं, डीप टेक सेक्टर बेहद कैपिटल इंटेंसिव (Capital Intensive) है। यहाँ लैब्स, भारी मशीनरी और हाई-एंड टैलेंट पर मोटा निवेश करना पड़ता है। हालांकि सरकारी फंड एक बड़ा उत्प्रेरक (Catalyst) है, लेकिन असल कामयाबी इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनियां अपने प्रोटोटाइप को कमर्शियल लेवल पर कैसे उतारती हैं।

भारत क्यों है एक 'बेहतरीन टेस्टिंग ग्राउंड'?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत की विविध भौगोलिक परिस्थितियां हार्डवेयर कंपनियों के लिए एक नेचुरल टेस्टिंग लैब की तरह काम करती हैं। बिजली की अस्थिरता और अलग-अलग मौसमों में अपने प्रोडक्ट को टेस्ट करने का अनुभव कंपनियों को इंटरनेशनल मार्केट में ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के मुकाबले मजबूती देगा।

जोखिम और सतर्कता

सॉफ्टवेयर फर्मों की तुलना में डीप टेक में रिस्क अलग हैं। यहां डेवलपमेंट साइकिल बहुत लंबी है और कंपनियों को प्रॉफिटेबल होने के लिए कई फंडिंग राउंड्स से गुजरना पड़ सकता है। फिलहाल, देश में इंडिपेंडेंट टेस्टिंग लैब्स की कमी भी एक बड़ी चुनौती है।

निवेशकों के लिए क्या है 'वॉचलिस्ट'?

आने वाली तिमाहियों में निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि कंपनियां अपने कैपिटल का एलोकेशन कैसे कर रही हैं। जो कंपनियां 'माइलस्टोन-बेस्ड फंडिंग' का इस्तेमाल कर रही हैं—यानी किसी लक्ष्य को हासिल करने पर ही पैसा रिलीज होना—वे भविष्य में सुरक्षित दांव हो सकती हैं। लॉन्ग टर्म में वे कंपनियां सबसे सफल होंगी जो अपने डीप टेक हार्डवेयर को ग्लोबल सप्लाई चेन में मजबूती से फिट कर पाएंगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.