भारत सरकार अपनी सोवरेन क्लाउड पॉलिसी को नया रूप दे रही है ताकि AI इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा पर घरेलू नियंत्रण बना रहे। डेटा रेजिडेंसी से आगे बढ़कर यह बदलाव Tata Consultancy Services, Bharti Airtel और Yotta जैसी स्थानीय कंपनियों के लिए सरकारी टेंडर के बड़े मौके खोल सकता है।
मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (MeitY) भारत की सोवरेन क्लाउड पॉलिसी को अपडेट कर रही है। अब फोकस सिर्फ डेटा रेजिडेंसी पर नहीं, बल्कि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर पूर्ण नियंत्रण हासिल करने पर है। सरकार ऐसे फ्रेमवर्क पर काम कर रही है जिससे संवेदनशील डेटा और AI कंप्यूटिंग हार्डवेयर पर भारत का मालिकाना हक रहे, ताकि विदेशी सप्लाई चेन पर निर्भरता कम हो सके।\n\nयह नीति राष्ट्रीय सुरक्षा और भू-राजनीतिक जोखिमों को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है। जैसे-जैसे AI सरकारी कामकाज का हिस्सा बन रहा है, नीति निर्माताओं को चिंता है कि विदेशी इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भरता सुरक्षा में सेंध लगा सकती है। इसी दिशा में C-DAC जैसे सरकारी संस्थान स्वदेशी AI क्लाउड क्षमताओं के लिए टेंडर जारी कर रहे हैं।\n\n### मार्केट में दो गुट\n\nइस बदलाव ने इंडस्ट्री को दो हिस्सों में बांट दिया है। Microsoft, Amazon Web Services (AWS) और Google जैसे ग्लोबल खिलाड़ी अभी भी अपनी लोकलाइज्ड क्लाउड सेवाओं को सुरक्षित बता रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर Tata Consultancy Services (TCS), Bharti Airtel और Yotta जैसी घरेलू कंपनियां स्वदेशी कंट्रोल और हार्डवेयर पर दांव लगा रही हैं। उनका मानना है कि क्रिटिकल AI वर्कलोड के लिए पूरी तरह से भारतीय स्वामित्व वाला सिस्टम ही लंबी अवधि में सुरक्षित है।\n\n### निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?\n\nनिवेशकों की नजर अब रेगुलेटरी फ्रेमवर्क पर होनी चाहिए। अगर सरकार घरेलू स्वामित्व पर सख्त नियम लाती है, तो स्थानीय कंपनियों को बड़े सरकारी कॉन्ट्रैक्ट मिल सकते हैं, हालांकि इससे उनका कैपिटल एक्सपेंडिचर भी बढ़ेगा। वहीं, नियमों में ढील मिलने पर ग्लोबल दिग्गज अपना दबदबा बनाए रख सकते हैं। निवेशकों को आने वाले सरकारी टेंडर्स और इन कंपनियों के इंफ्रास्ट्रक्चर रोलआउट की गति पर पैनी नजर रखने की जरूरत है।
