भारत ने अब सेमीकंडक्टर निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ा दिया है। देश में **5** नई सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग यूनिट्स चालू हो गई हैं। **₹1.275 लाख करोड़** की Semicon 2.0 पॉलिसी के तहत सरकार का लक्ष्य **2035** तक इस सेक्टर को **$200 बिलियन** की वैल्यू तक ले जाना है।
भारत की मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की तैयारी
देश में सेमीकंडक्टर असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग (ATMP) यूनिट्स के शुरू होने के साथ ही भारत का इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग का सपना अब हकीकत बनता दिख रहा है। इसमें CDIL Semiconductor, Suchi Semicon, Micron, Kaynes Technology और CG Power and Industrial Solutions जैसी कंपनियों की प्रोडक्शन लाइन्स अब एक्टिव हो गई हैं, जो विदेशी निर्भरता को कम करने में बड़ी भूमिका निभाएंगी।
क्या है Semicon 2.0 का मास्टरप्लान?
सरकार ने Semicon 2.0 के लिए ₹1.275 लाख करोड़ का बजट रखा है। पहले फेज में जहां सिर्फ बेसिक असेंबली पर जोर था, वहीं अब नई पॉलिसी रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D), इक्विपमेंट प्रोक्योरमेंट और कच्चे माल की सप्लाई चेन को मजबूत करने पर केंद्रित है।
चुनौतियां और निवेशकों के लिए संकेत
हालांकि यह सफर आसान नहीं है। सेमीकंडक्टर प्लांट काफी कैपिटल-इंटेंसिव होते हैं, जिनमें बिजली और भारी मात्रा में शुद्ध पानी की जरूरत होती है। इसके अलावा, सिलिकॉन वेफर्स और स्पेशलाइज्ड गैसों के लिए अभी भी भारत का आयात पर निर्भर होना एक बड़ी चुनौती है।
निवेशकों को इन कंपनियों के ऑर्डर बुक, प्रोजेक्ट टाइमलाइन और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की रफ्तार पर नजर रखनी चाहिए। ताइवान और वियतनाम जैसे ग्लोबल हब से मुकाबला करने के लिए घरेलू कंपनियों की कॉस्ट एफिशिएंसी और प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन ही लंबी अवधि में इनकी असली ताकत तय करेगा।
