India Online Travel Market: FY28 तक ₹3.84 लाख करोड़ का आंकड़ा पार! जानिए क्या हैं ग्रोथ के मंत्र

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
India Online Travel Market: FY28 तक ₹3.84 लाख करोड़ का आंकड़ा पार! जानिए क्या हैं ग्रोथ के मंत्र

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भारतीय ऑनलाइन ट्रैवल मार्केट (Online Travel Market) जबरदस्त रफ्तार पकड़ रहा है। अनुमान है कि यह बाजार फाइनेंशियल ईयर 2028 (FY28) तक ₹3.84 लाख करोड़ के आंकड़े को छू लेगा। यह ग्रोथ लगभग 13% सालाना दर से बढ़ने की उम्मीद है।

बाज़ार में तेजी का मुख्य कारण

यह ग्रोथ इसलिए भी खास है क्योंकि यह ग्लोबल ऑनलाइन ट्रैवल मार्केट की अनुमानित ग्रोथ से काफी ज्यादा है। इसके पीछे मुख्य वजह स्मार्टफोन का बढ़ता इस्तेमाल और लोगों के यात्रा प्लान करने के तरीके में आया बदलाव है। उम्मीद है कि 2028 तक भारत में कुल बुकिंग्स में 65% हिस्सेदारी डिजिटल चैनलों की होगी।

बड़ी कंपनियों की रणनीति

इस क्षेत्र की बड़ी कंपनियां, जैसे MakeMyTrip, Ixigo और Yatra, अब सिर्फ फ्लाइट या होटल बुकिंग तक सीमित नहीं हैं। वे छोटी, खास कंपनियों को खरीदकर (Acquisitions) अपने प्लेटफॉर्म को और मजबूत बना रही हैं। इनका लक्ष्य एक ऐसा 'ऑल-इन-वन' इकोसिस्टम तैयार करना है, जहां यूजर यात्रा के हर पड़ाव के लिए इन्हीं ऐप्स का इस्तेमाल करें। इससे यूजर को अपने प्लेटफॉर्म पर बनाए रखने और नए ग्राहक खोजने की लागत कम करने में मदद मिलेगी।

निवेशकों के लिए बड़ी चुनौती

हालांकि, इस बूमिंग मार्केट में निवेशकों के लिए कुछ चिंताएं भी हैं। सबसे बड़ी चुनौती 'टेक रेट्स' यानी कमीशन पर पड़ने वाला दबाव है। जैसे-जैसे एयरलाइंस और होटल अपनी सीधी बुकिंग वाली वेबसाइट्स और ऐप्स को बढ़ावा दे रहे हैं, वे ट्रैवल एग्रीगेटर को कमीशन देने से बचना चाहते हैं। ऐसे में, इन कंपनियों को ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए भारी मार्केटिंग खर्च और मुनाफा बनाए रखने के बीच संतुलन साधना होगा।

AI और टेक्नोलॉजी का कमाल

टेक्नोलॉजी, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इस सेक्टर में बड़ा रोल निभा रही है। कंपनियां अब AI का इस्तेमाल पर्सनलाइज्ड ट्रिप प्लान और डायनामिक प्राइसिंग के लिए कर रही हैं, जिससे कन्वर्जन रेट बढ़ रहा है। ये कंपनियाँ सिर्फ सर्च और बुक करने वाली साइट्स से आगे बढ़कर एक कम्प्लीट ट्रैवल प्लानर बनने की ओर बढ़ रही हैं।

आगे क्या देखें?

इन ट्रैवल प्लेटफॉर्म्स का भविष्य कई बातों पर निर्भर करेगा। निवेशक ग्राहक अधिग्रहण लागत (Customer Acquisition Cost) और रेवेन्यू ग्रोथ के बीच संतुलन पर बारीकी से नजर रखेंगे। अगर प्रतिस्पर्धा के चलते कंपनियां मार्केट शेयर के लिए भारी डिस्काउंट देती हैं, तो उनके प्रॉफिट मार्जिन पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, ग्लोबल इकोनॉमिक कंडीशन और फ्यूल प्राइस जैसे बाहरी फैक्टर्स भी यात्रा की कुल लागत पर असर डाल सकते हैं।

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Disclaimer:This article is published for informational purposes only. While reasonable efforts are made to ensure accuracy, completeness, and timeliness, readers are encouraged to independently verify information before making any decisions based on the content. The views and information presented are subject to editorial review and may be updated without notice.