Ministry of Electronics and Information Technology (MeitY) ने सरकारी डेटा की सुरक्षा के लिए एक नया क्लाउड सॉवरेन्टी फ्रेमवर्क पेश किया है, जिसके तहत मिशन-क्रिटिकल डेटा के लिए 'एयर-गैपिंग' (air-gapping) अनिवार्य होगी।
भारत सरकार ने अपने संवेदनशील सरकारी डेटा को विदेशी पहुंच से बचाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। MeitY के इस नए फ्रेमवर्क के तहत अब मिशन-क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को 'एयर-गैपिंग' के दायरे में लाया जाएगा। आसान भाषा में समझें तो, एयर-गैपिंग का मतलब है कंप्यूटर सिस्टम को पब्लिक इंटरनेट से पूरी तरह अलग कर देना, ताकि डेटा बाहरी नेटवर्क की पहुंच से बाहर रहे।
क्यों लिया गया यह फैसला?
यह कदम विदेशी क्लाउड कंपनियों पर निर्भरता कम करने और US CLOUD Act जैसे विदेशी कानूनों के जोखिमों को खत्म करने के लिए उठाया गया है। अब सरकारी एजेंसियां अपने क्लाउड पार्टनरशिप का ऑडिट करेंगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे ऑपरेशनल इंडिपेंडेंस के नए मानकों पर खरे उतरते हैं।
मार्केट और निवेशकों के लिए मायने
इस बदलाव से घरेलू डेटा सेंटर और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के लिए डिमांड बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, सरकारी विभागों के लिए यह एक महंगा और जटिल बदलाव साबित हो सकता है क्योंकि इसके लिए उन्हें अपने डिजिटल सिक्योरिटी बजट को बढ़ाना होगा। निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी होगी कि सरकारी एजेंसियां कितनी तेजी से इस बदलाव को अपनाती हैं और इसका सीधा फायदा किन घरेलू टेक्नोलॉजी प्लेयर्स को मिलता है।
