AI और भारतीय कानून: वकील करेंगे AI का इस्तेमाल, पर अंतिम फैसला उन्हीं का!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
AI और भारतीय कानून: वकील करेंगे AI का इस्तेमाल, पर अंतिम फैसला उन्हीं का!
Overview

भारत की लॉ फर्म्स (Law Firms) अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को सिर्फ एक टूल के तौर पर इस्तेमाल कर रही हैं, वकीलों की जगह लेने के लिए नहीं। "ह्यूमन-इन-द-लूप" (Human-in-the-loop) यानी वकील की निगरानी वाला तरीका अपनाया जा रहा है, जिसमें वकीलों का फैसला, डेटा की गोपनीयता और बारीकी से जांच पर जोर दिया जा रहा है।

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भारतीय कानूनी क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल तेज़ी से बदल रहा है। अब यह सिर्फ कामों को ऑटोमेट (Automate) करने तक सीमित नहीं है, बल्कि "ह्यूमन-इन-द-लूप" (HITL) यानी वकील की निगरानी वाले एडवांस्ड मॉडल को अपनाया जा रहा है। लॉ फर्म्स (Law Firms) और इन-हाउस लीगल टीम्स (In-house legal teams) अब बड़े फैसलों के लिए AI पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय इंसानी फैसलों को ज़्यादा अहमियत दे रही हैं। यह बदलाव भारतीय कानून की जटिलताओं और लगातार बदलते नियमों को देखते हुए ज़रूरी है, जिसके लिए एक्सपर्ट्स की निगरानी की ज़रूरत पड़ती है।

AI सहायक है, मालिक नहीं

शुरुआती दौर में लीगल टेक्नोलॉजी (Legal Technology) पर चर्चा AI की क्षमता पर केंद्रित थी कि कैसे यह काम को तेज़ कर सकता है। लेकिन भारतीय कानूनी प्रणाली की जटिलताओं ने इस सोच की सीमाओं को दिखाया है। अब HITL मॉडल को महत्व मिल रहा है, जिसमें AI को वकीलों का एक शक्तिशाली सहायक माना जा रहा है, न कि उनका विकल्प।

HITL प्रक्रिया: इनपुट, रिव्यू, साइन-ऑफ

HITL मॉडल में, कानूनी पेशेवर AI के साथ तीन मुख्य चरणों में काम करते हैं: इनपुट, रिव्यू और साइन-ऑफ।

  • इनपुट: इस चरण में यह तय किया जाता है कि AI का इस्तेमाल किस काम के लिए होगा और सटीक प्रॉम्प्ट्स (Prompts) कैसे बनाए जाएंगे। क्लाइंट के डेटा की गोपनीयता बनाए रखना सबसे ज़रूरी है। संवेदनशील जानकारी फर्म के कंट्रोल वाले सिस्टम में सुरक्षित रखी जाती है, न कि पब्लिक AI टूल्स की तरह। सटीक और विस्तृत प्रॉम्प्ट्स से ही उपयोगी आउटपुट मिल पाता है।

  • रिव्यू: यह चरण इंसानी निगरानी का मुख्य हिस्सा है। AI से तैयार की गई सामग्री को एक ड्राफ्ट (Draft) की तरह माना जाता है, जिसकी पूरी तरह से जांच की जाती है। कानूनी पेशेवरों को आधिकारिक रिकॉर्ड्स के साथ AI की दलीलों को मिलाना होता है, क्लाइंट के जोखिम उठाने की क्षमता और फर्म की रणनीतियों को ध्यान में रखते हुए AI के तर्क का मूल्यांकन करना होता है, और यह सुनिश्चित करना होता है कि आउटपुट किसी खास क्लाइंट के तथ्यों पर आधारित हो, न कि सामान्य जवाब। ऐसे टूल्स जो डॉक्यूमेंट्स की साइड-बाय-साइड तुलना (Side-by-side document comparison) करने और साइटेशन (Citation) जांचने में मदद करते हैं, वे बहुत महत्वपूर्ण हो गए हैं।

  • साइन-ऑफ: अंतिम साइन-ऑफ (Sign-off) से जवाबदेही तय होती है। एक वकील, जो आमतौर पर सीनियर एसोसिएट (Senior Associate) या पार्टनर (Partner) होता है, AI-असिस्टेड डॉक्यूमेंट (AI-assisted document) की अंतिम जिम्मेदारी लेता है। यह सुनिश्चित करता है कि कानूनी पक्षों को मंज़ूरी देना अभी भी एक इंसानी फैसला है। AI-असिस्टेड ड्राफ्ट्स (AI-assisted drafts) को मौजूदा वर्कफ्लो (Workflows) में, जैसे Word और Outlook में, एकीकृत करना अप्रूवल प्रक्रिया (Approval process) को सुचारू बनाता है।

AI नीतियां और ट्रेनिंग विकसित करना

जैसे-जैसे AI का एकीकरण बढ़ रहा है, भारतीय कानूनी फर्म्स औपचारिक AI नीतियां (AI Policies) बना रही हैं। इन नीतियों में अप्रूव्ड टूल्स (Approved tools), उपयोग के दिशानिर्देश, डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट (Digital Personal Data Protection Act) जैसे नियमों के अनुसार डेटा हैंडलिंग प्रोटोकॉल (Data handling protocols), और गवर्नेंस स्ट्रक्चर्स (Governance structures) शामिल होंगे। एक मुख्य फोकस जूनियर वकीलों को AI टूल्स का इस्तेमाल सीखने के सहायक के रूप में करने के लिए प्रशिक्षित करना है, न कि उनके विकास में बाधा के रूप में। अब स्टैंडर्ड प्रैक्टिस (Standard practices) में स्पष्ट निगरानी तंत्र (Oversight mechanisms) और सभी AI-असिस्टेड कामों का विस्तृत डॉक्यूमेंटेशन (Documentation) शामिल है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि AI मुश्किल काम संभाले, पर अंतिम कानूनी रणनीति और क्लाइंट की सलाह इंसानी नियंत्रण में रहे।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.