India’s Global Capability Centers: अब हेडकाउंट नहीं, AI वैल्यू से तय होगी सफलता

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
India’s Global Capability Centers: अब हेडकाउंट नहीं, AI वैल्यू से तय होगी सफलता

भारत में मौजूद Global Capability Centers (GCCs) अब कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने के पुराने मॉडल से किनारा कर रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते दखल के बीच, अब कंपनियों का पूरा फोकस ऑपरेशनल स्केल के बजाय नवाचार और बिजनेस वैल्यू पर शिफ्ट हो गया है।

भारत के GCC सेक्टर में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। बीते सालों में इन केंद्रों की सफलता का पैमाना वहां काम करने वाले लोगों की संख्या हुआ करती थी। लेकिन अब यह पारंपरिक मॉडल पूरी तरह बदल रहा है। अब कंपनी की वैल्यू कर्मचारियों के आंकड़ों से नहीं, बल्कि उनके द्वारा दिए जा रहे बिजनेस आउटकम से तय की जा रही है।

AI का बढ़ता प्रभाव

इंडस्ट्री के आंकड़ों पर गौर करें तो करीब 40% रूटीन टेक्निकल काम अब AI-असिस्टेड वर्कफ्लो के जरिए किए जा रहे हैं। जैसे-जैसे ऑटोमेशन बढ़ रहा है, कंपनियों की निर्भरता ज्यादा लोगों को हायर करने पर कम होती जा रही है। अब फर्म्स इस बात पर मंथन कर रही हैं कि कैसे भारत में मौजूद अपने फुटप्रिंट को लागत-दक्षता (cost-efficiency) से हटाकर हाई-इम्पैक्ट नतीजों की तरफ ले जाया जाए।

नया मंत्र: कम लोग, ज्यादा आउटपुट

पुराने समय में कंपनियां क्षमता बढ़ाने के लिए जानी जाती थीं, लेकिन आज की जरूरत है डोमेन एक्सपर्टीज। अब वही सेंटर्स सफल माने जा रहे हैं, जो कम लोगों की टीम के साथ जटिल समस्याओं को सुलझाकर तेजी से रेवेन्यू जेनरेट कर रहे हैं। यह बदलाव भारतीय टेक इकोसिस्टम के लिए एक बड़ी चुनौती और अवसर दोनों है।

जोखिम और भविष्य की राह

जो कंपनियां अभी भी पुराने मेट्रिक्स यानी 'सिर्फ हेडकाउंट बढ़ाने' की रेस में फंसी हैं, उन्हें 'एफिशिएंसी ट्रैप' का सामना करना पड़ सकता है। यदि वे खुद को नई तकनीक के हिसाब से नहीं ढालतीं, तो उनकी प्रासंगिकता कम हो सकती है। आने वाले समय में GCCs की सफलता इस बात पर टिकी होगी कि वे कितनी कुशलता से AI को अपने साथ जोड़ते हैं और लागत केंद्रों (cost centers) से बदलकर 'वैल्यू क्रिएशन' के इंजन बन पाते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.