Engineering Talent Hubs: भारत के 61% टेक टैलेंट सिर्फ इन 3 शहरों में, निवेशकों के लिए क्या है रिस्क?

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AuthorAditya Rao|Published at:
Engineering Talent Hubs: भारत के 61% टेक टैलेंट सिर्फ इन 3 शहरों में, निवेशकों के लिए क्या है रिस्क?

भारत का **61%** फॉरवर्ड-डिप्लॉयड इंजीनियरिंग टैलेंट अब बेंगलुरु, हैदराबाद और दिल्ली-एनसीआर जैसे बड़े केंद्रों में सिमट गया है। हालांकि यह एक बड़े कार्यबल का आधार है, लेकिन **70%** टैलेंट के पास **8 साल** से कम का अनुभव होना सेक्टर के लिए एक बड़ी चुनौती है।

हालिया डेटा के मुताबिक, भारत में फॉरवर्ड-डिप्लॉयड इंजीनियरिंग टैलेंट (यानी वे प्रोफेशनल्स जो सीधे क्लाइंट साइड या टेक्निकल भूमिकाओं में हैं) का 61% हिस्सा केवल तीन महानगरों में है। इसमें बेंगलुरु 34%, हैदराबाद 14% और दिल्ली-एनसीआर 13% के साथ प्रमुख हब बने हुए हैं। टेक सेक्टर के निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि इन शहरों में एकाग्रता का मतलब है कि बड़ी टेक कंपनियां यहीं से अपने ग्लोबल ऑपरेशंस चलाती हैं।

मार्जिन पर दबाव का रिस्क

बेशक, इन शहरों में टैलेंट की उपलब्धता ज्यादा है, लेकिन यहीं पर कड़ी प्रतिस्पर्धा भी है। प्रोफेशनल्स को हासिल करने की दौड़ में कंपनियों के बीच सैलरी हाइक को लेकर जंग छिड़ी रहती है। जब बड़ी संख्या में कर्मचारी महंगे शहरों में स्थित हों, तो कंपनी के ऑपरेशनल कॉस्ट और प्रॉफिट मार्जिन पर सीधा असर पड़ना तय है।

अनुभव की कमी (Experience Gap)

रिपोर्ट के मुताबिक, इस वर्कफोर्स का 70% हिस्सा 8 साल से कम के अनुभव वाला है। एआई (AI) और अन्य जटिल प्रोजेक्ट्स के लिए अब सीनियर लीडरशिप की डिमांड बढ़ रही है। अगर कंपनियां अपने यंग टैलेंट को तेजी से ट्रेन नहीं कर पाईं, तो प्रोजेक्ट्स में देरी हो सकती है, जिसका सीधा असर कंपनी की वैल्यूएशन और नए कॉन्ट्रैक्ट्स जीतने की क्षमता पर पड़ेगा।

कौन है बड़ा प्लेयर?

वर्तमान में बड़ी टेक कंपनियां कुल टैलेंट पूल का 38% हिस्सा रखती हैं, जबकि IT सर्विसेज और कंसल्टिंग फर्म्स की हिस्सेदारी 24% है। भविष्य में वही कंपनियां बेहतर परफॉर्म करेंगी जो अपने मौजूदा युवा टैलेंट को अपस्किल (upskill) करने की लागत को बेहतर ढंग से मैनेज कर सकेंगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.