भारत में नए डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। इस वजह से अब एक राष्ट्रीय नीति (National Policy) की मांग उठ रही है, जिसका असर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनियों के मुनाफे और प्रोजेक्ट्स की टाइमलाइन पर पड़ सकता है।
भारत का डेटा सेंटर बाजार तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन अब यह एक बड़ी चुनौती का सामना कर रहा है। ठाणे जैसे तेजी से विकसित हो रहे इलाकों में स्थानीय निवासी डेटा सेंटर के कारण पानी की कमी और शोर (Noise Pollution) को लेकर विरोध कर रहे हैं। इन विरोधों ने एक बड़ी सच्चाई को सामने ला दिया है—देश में अब तक कोई भी कॉम्प्रिहेंसिव नेशनल डेटा सेंटर पॉलिसी नहीं है, जिससे राज्यों के नियम अलग-अलग हैं।
स्टैंडर्ड रेगुलेशन की बढ़ती जरूरत
साल 2020 में डेटा सेंटर की क्षमता लगभग 375 मेगावाट (MW) थी, जो 2025 तक बढ़कर 1,575 मेगावाट से अधिक हो गई है। इतनी बड़ी ग्रोथ के बावजूद, यह इंडस्ट्री अब तक बिखरे हुए स्टेट-लेवल नियमों पर काम कर रही है। सरकार अब नए दिशा-निर्देशों पर विचार कर रही है, जिनमें पर्यावरण से जुड़ी सख्त शर्तें शामिल हो सकती हैं, खासकर पानी की कमी वाले इलाकों के लिए।
निवेश और मुनाफे पर असर
अगर सरकार भविष्य में 'क्लोज्ड-लूप वॉटर कूलिंग' सिस्टम या शोर को कम करने वाली नई तकनीक अनिवार्य करती है, तो कंपनियों के कैपिटल एक्सपेंडिचर (CAPEX) में भारी उछाल आ सकता है। यह निवेश लंबे समय में प्रोजेक्ट की स्थिरता के लिए तो अच्छा है, लेकिन अगर सही मैनेजमेंट नहीं हुआ, तो यह सीधे कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव डाल सकता है।
इसके अलावा, स्थानीय विरोध और रेगुलेटरी बदलावों के कारण प्रोजेक्ट्स के पूरा होने में देरी भी एक बड़ा रिस्क है। डेटा सेंटर बिजनेस में समय पर काम पूरा करना सबसे अहम है क्योंकि क्लाउड सर्विसेज और AI की मांग लगातार बढ़ रही है। जो कंपनियां पहले से ही सस्टेनेबल डिजाइन को अपना रही हैं, वे भविष्य में सरकारी मंजूूरी और रेगुलेटरी बाधाओं से बचने में ज्यादा सफल होंगी।
भविष्य की राह
भारत की AI-रेडी इकोनॉमी के लिए मजबूत डेटा सेंटर की नींव जरूरी है। निवेशकों को सरकार की ओर से आने वाले उन अपडेट्स पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए जो सस्टेनेबल कूलिंग और रिसोर्स उपयोग को लेकर नियम तय करेंगे। ये गाइडलाइन्स ही तय करेंगी कि इंडस्ट्री की लागत क्या होगी और कंपनियां इस ग्रोथ को कितनी कुशलता से मैनेज कर पाएंगी।
