Data Centre Sector: भारत में नौकरियों की बहार, 2030 तक 4.33 लाख युवाओं को मिलेगा काम

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Data Centre Sector: भारत में नौकरियों की बहार, 2030 तक 4.33 लाख युवाओं को मिलेगा काम

भारत का डेटा सेंटर (Data Centre) उद्योग तेजी से विस्तार कर रहा है। अनुमान है कि 2030 तक इस सेक्टर में **4.33 लाख** नई नौकरियां पैदा होंगी। अब केवल IT ही नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग और AI इंफ्रास्ट्रक्चर के जानकारों की भी भारी मांग है।

नौकरियों का बदलता गणित

डेटा सेंटर का दायरा अब सिर्फ IT इंडस्ट्री तक सीमित नहीं रह गया है। यह सेक्टर अब कंस्ट्रक्शन, पावर डिस्ट्रीब्यूशन और स्पेशलाइज्ड फैसिलिटी मैनेजमेंट के लिए एक बड़े इंजन के तौर पर उभरा है। AI इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग के चलते अब लिक्विड कूलिंग, थर्मल मैनेजमेंट और एडवांस MLOps जैसे स्किल्स रखने वाले प्रोफेशनल्स की जरूरत सबसे ज्यादा है।

बड़े दिग्गजों का दांव और निवेश

Adani और Reliance जैसे बड़े औद्योगिक समूहों के साथ ग्लोबल हाइपरस्केलर्स इस डिजिटल बैकबोन को मजबूत करने के लिए $100 बिलियन से अधिक का निवेश कर रहे हैं। मिड-2026 तक 1.6 GW की क्षमता को बढ़ाकर 2030 तक 6 GW से 9 GW तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए कंपनियों ने अपनी हायरिंग स्ट्रेटेजी पूरी तरह बदल दी है।

विकास की राह में चुनौतियां

सब कुछ इतना आसान नहीं है। एक मुख्य समस्या एकसमान नेशनल पॉलिसी की कमी है, जिसके कारण एक प्रोजेक्ट के लिए 40 से 50 अलग-अलग मंजूरियां लेनी पड़ती हैं। इस देरी के चलते कंस्ट्रक्शन में 18 से 30 महीने तक का समय बर्बाद हो सकता है, जो निवेशकों के लिए बड़ा रिस्क है।

पर्यावरणीय चिंताएं और भविष्य

विजाग जैसे शहरों में पानी की खपत और ध्वनि प्रदूषण को लेकर स्थानीय विरोध भी देखे गए हैं। भविष्य में जब कंपनियां टियर-2 और टियर-3 शहरों का रुख करेंगी, तो उन्हें लोकल ग्रिड रिलायबिलिटी और रिन्यूएबल एनर्जी की लॉजिस्टिकल चुनौतियों से निपटना होगा। प्रोजेक्ट्स की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनियां कितनी तेजी से इन रेगुलेटरी और पर्यावरणीय बाधाओं को पार करती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.