Semiconductor Industry: चिप बनाने की राह में पानी का 'संकट', क्या निवेशकों की चिंता बढ़ेगी?

TECHNOLOGY
Whalesbook Logo
AuthorKaran Malhotra|Published at:
Semiconductor Industry: चिप बनाने की राह में पानी का 'संकट', क्या निवेशकों की चिंता बढ़ेगी?

भारत का सेमीकंडक्टर हब बनने का सपना बड़ी चुनौती का सामना कर रहा है। एक मेगा-फॅब को हर दिन **10 से 15 मिलियन** गैलन पानी की जरूरत होती है, जो कि निवेश और ऑपरेशनल जोखिम का एक बड़ा कारण बन सकता है।

भारत के सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और माइक्रोन टेक्नोलॉजी जैसी बड़ी कंपनियां अपने कदम जमा रही हैं। लेकिन जैसे-जैसे काम आगे बढ़ रहा है, एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है—क्या चिप बनाने के लिए जरूरी पानी की भारी मांग से कंपनी का मुनाफा प्रभावित होगा? इंडस्ट्री डेटा के अनुसार, एक सिंगल मेगा-फॅब को रोजाना 10 से 15 मिलियन गैलन अल्ट्रा-प्योर पानी की आवश्यकता होती है।

निवेशकों के लिए फाइनेंशियल रिस्क

निवेशकों को यह समझना होगा कि पानी की यह निर्भरता सिर्फ एक एनवायरमेंटल मुद्दा नहीं है, बल्कि यह एक बड़ा ऑपरेशनल रिस्क भी है। यदि प्लांट को निरंतर पानी नहीं मिला, तो प्रोडक्शन पूरी तरह ठप हो सकता है, जिससे कंपनी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके अलावा, गुजरात जैसे राज्यों में ग्राउंड-वॉटर पहले ही दबाव में है, जिससे रेगुलेटरी मुश्किलों और प्रोजेक्ट में देरी की आशंका बनी रहती है।

रीसाइक्लिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर और Capex

सबसे जरूरी बात है पानी की रीसाइक्लिंग। अगर कंपनियां शुरुआती चरण में ही रीसाइक्लिंग सिस्टम नहीं लगाती हैं, तो बाद में 'रेट्रोफिटिंग' (Retrofitting) करना न केवल तकनीकी रूप से कठिन है, बल्कि बहुत खर्चीला भी है। इससे कंपनी का कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) बढ़ सकता है, जिसका सीधा असर मुनाफे के मार्जिन (Profit Margins) पर पड़ेगा। ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के अनुसार, मॉडर्न फॅब्स को 80% से 95% तक वॉटर सर्कुलरिटी का लक्ष्य रखना चाहिए।

रेगुलेटरी और केमिकल रिस्क

पानी के अलावा, चिप बनाने में इस्तेमाल होने वाले केमिकल (जैसे PFAS या 'फॉरेवर केमिकल्स') पर भी ग्लोबल रेगुलेटर्स की नजरें सख्त हो रही हैं। यदि नियमों में बदलाव हुआ, तो इन केमिकल्स को हटाने या बदलने का खर्च कंपनी के फाइनेंशियल हेल्थ को बिगाड़ सकता है। सरकार की PLI स्कीम की सफलता इन प्लांट्स की दक्षता और उनके एनवायरमेंटल मैनेजमेंट पर ही टिकी है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.