भारत के स्टार्टअप्स अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को स्मार्टफोन स्क्रीन से निकालकर फिजिकल हार्डवेयर में फिट कर रहे हैं। Kubo Care और NeoSapien जैसी कंपनियां 'एम्बिएंट इंटेलिजेंस' की ओर बढ़ रही हैं, लेकिन इस राह में मैन्युफैक्चरिंग चेन, डेटा प्राइवेसी और हार्डवेयर के पुराने होने जैसी बड़ी चुनौतियां भी हैं।
भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। कंपनियां अब AI को केवल स्मार्टफोन ऐप्स तक सीमित रखने के बजाय इसे रोजमर्रा की वस्तुओं में जोड़ रही हैं। इसे 'एम्बिएंट इंटेलिजेंस' कहा जा रहा है, जहाँ डिवाइस स्क्रीन के बिना भी स्वायत्त रूप से काम कर सकते हैं।
प्रमुख कंपनियां और नवाचार
बेंगलुरु स्थित Kubo Care इस क्षेत्र में काफी आगे है। उन्होंने सीनियर सिटीजन्स की देखरेख के लिए रडार-बेस्ड सेंसिंग तकनीक विकसित की है। यह सिस्टम बिना किसी पहनने वाले डिवाइस या ऐप के, केवल मूवमेंट पैटर्न को ट्रैक करके आपातकालीन स्थितियों, जैसे गिरने की घटनाओं, का पता लगा लेता है। यह तकनीक अब भारत, जापान और अमेरिका में सक्रिय है।
वहीं, NeoSapien ने 'Neo 1' नामक एक AI-नेटिव वियरेबल लॉन्च किया है, जो मीटिंग्स का ट्रांसक्रिप्शन और नोट्स बनाने जैसे कामों को आसान बनाता है। इस स्टार्टअप ने $2 मिलियन का सीड राउंड फंड जुटाया है, जिसका नेतृत्व Merak Ventures ने किया है।
विकास की राह में चुनौतियां
भारत में हार्डवेयर निर्माण अभी भी एक जटिल काम है। इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन और टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकासशील होने के कारण स्टार्टअप्स को अक्सर लॉजिस्टिक्स से जूझना पड़ता है। सॉफ्टवेयर के विपरीत, हार्डवेयर को तुरंत अपडेट करना मुश्किल होता है, जिससे इसके जल्द पुराना (Obsolete) होने का रिस्क बना रहता है।
निवेशकों की चिंताएं
निवेशक इस सेक्टर की सस्टेनेबिलिटी पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। मुख्य डर यह है कि यदि क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर का बिजनेस मॉडल बदलता है, तो महंगे हार्डवेयर डिवाइस एक 'डंब' (बेकार) वस्तु बनकर रह सकते हैं। इसके अलावा, प्राइवेसी का मुद्दा भी बड़ा है। चूंकि ये डिवाइस हमेशा 'सुनते' रहते हैं, इसलिए उपभोक्ता का भरोसा जीतना और डेटा सुरक्षा मानकों को पूरा करना इन कंपनियों के लिए सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा होगी।
