भारत में ऑनलाइन शॉपिंग का तरीका तेजी से बदल रहा है। अब करीब **30 करोड़** ऑनलाइन खरीदार प्रोडक्ट खोजने के लिए पारंपरिक सर्च इंजन की जगह AI असिस्टेंट का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह बदलाव खास तौर पर Gen Z और छोटे शहरों के ग्राहकों के बीच ज्यादा देखा जा रहा है।
AI के आगे पारंपरिक मार्केटिंग की हार?
यह बदलाव निवेशकों के लिए बड़ी खबर है, खासकर रिटेल, फाइनेंशियल सर्विसेज और कंज्यूमर गुड्स कंपनियों के लिए। 'कैंपेन-आधारित' मार्केटिंग अब उतना असरदार नहीं रहा, और जो कंपनियां डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को AI के हिसाब से नहीं बदलेंगी, उन्हें नए ग्राहक खोजने में ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ सकता है।
SEO का बदलता चेहरा: GEO का जमाना!
पारंपरिक सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन (SEO) अब उतना कारगर नहीं रहा। AI अब सीधे जवाब देता है, न कि लिंक्स की लिस्ट। इसलिए, सिर्फ सर्च इंजन पर टॉप रैंक पाना अब काफी नहीं है। कंपनियों को अब 'जेनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन' (GEO) पर ध्यान देना होगा, यानी AI के लिए खास कंटेंट तैयार करना। यह भविष्य में कमाई के लिए उतना ही जरूरी होगा जितना पहले SEO था।
क्षेत्रीय भाषाओं का बढ़ता महत्व
जैसे-जैसे भारत में इंटरनेट यूजर्स 90 करोड़ के करीब पहुंच रहे हैं, क्षेत्रीय भाषाओं में कम्युनिकेशन करना एक जरूरत बन गया है। अगर किसी ब्रांड का कंटेंट AI के लिए ग्राहक की अपनी भाषा (जैसे हिंदी, तमिल, तेलुगू, मराठी) में आसानी से पढ़ा और समझा नहीं जा सकता, तो वह ग्राहक की नजरों से गायब हो जाएगा।
फाइनेंशियल सर्विसेज में दिखा असर
फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर में, AI से आने वाले ट्रैफिक में 158% की भारी बढ़ोतरी हुई है, और कनवर्जन रेट भी 54% बढ़ गया है। जो कंपनियां अपनी डिजिटल प्लेटफॉर्म को AI-फ्रेंडली नहीं बनातीं, वे पीछे रह सकती हैं।
निवेशकों के लिए नई रणनीति
निवेशकों को अब सिर्फ 'डिजिटल प्रेजेंस' से आगे बढ़कर 'कस्टमर एक्सपीरियंस ऑर्केस्ट्रेशन' देखना होगा। AI एजेंट ग्राहकों के लिए रिसर्च और खरीदारी कर सकते हैं, इसलिए कंपनियों को वन-टू-वन पर्सनलाइजेशन पर जोर देना होगा।
निवेशकों को कंपनियों की एनुअल रिपोर्ट्स और मैनेजमेंट कमेंट्री पर नजर रखनी चाहिए। वे AI-रेडी कंटेंट, मल्टीलिंगुअल सपोर्ट और 'ऑलवेज-ऑन' एंगेजमेंट जैसी चीजों पर कंपनियों के खर्च को ट्रैक कर सकते हैं। AI-फर्स्ट डिजिटल दुनिया में आगे बने रहने वाली कंपनियां ही लंबे समय तक सफल होंगी।
