IIM बैंगलोर में AI पर मंथन: भारत के लीडर्स बनाएंगे बिज़नेस स्ट्रैटेजी

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
IIM बैंगलोर में AI पर मंथन: भारत के लीडर्स बनाएंगे बिज़नेस स्ट्रैटेजी

13 नवंबर 2026 को IIM बैंगलोर में 'ET AI बिज़नेस ट्रांसफॉर्मेशन मास्टरक्लास' का आयोजन होने जा रहा है। इस ख़ास इवेंट में भारत के टॉप एग्जीक्यूटिव्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को सिर्फ एक्सपेरिमेंट से आगे ले जाकर, बिज़नेस में प्रॉफिट कमाने वाली स्ट्रैटेजी पर चर्चा करेंगे।

एक्सपेरिमेंटल AI से आगे की राह

भारतीय कॉर्पोरेट लीडर्स के लिए 2026 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का एक्सपेरिमेंटल फेज से फुल-स्केल बिज़नेस इंटीग्रेशन तक का सफर एक बड़ा थीम रहने वाला है। 13 नवंबर 2026 को, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM) बैंगलोर में 'The Economic Times AI Business Transformation Masterclass' में विभिन्न सेक्टर्स के इंडस्ट्री एग्जीक्यूटिव्स इकट्ठा होंगे। इस इवेंट का मक़सद AI के प्रैक्टिकल एप्लीकेशन्स पर ज़ोर देना है, जो सिर्फ नई टेक्नोलॉजी की टेस्टिंग से हटकर असल में वैल्यू डिलीवर करें।

ROI साबित करने की चुनौती

कई बड़ी कंपनियों के लिए अब सबसे बड़ा चैलेंज AI को अपनाने से कहीं ज़्यादा, उसके रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (ROI) को साबित करना है। फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस, लॉजिस्टिक्स फर्म्स और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी कंपनियां अब इन AI टूल्स को अपने मौजूदा कॉम्प्लेक्स ऑपरेशंस में इंटीग्रेट करने के तरीकों पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। IndusInd Bank, PhonePe और Shadowfax जैसी कंपनियों के स्पीकर्स इस बात पर चर्चा करेंगे कि वे बैंकिंग और पेमेंट्स जैसे हाई-स्टेक एनवायरनमेंट्स में AI का इस्तेमाल करते समय गवर्नेंस और कंप्लायंस की ज़रूरतों को कैसे पूरा कर रहे हैं।

टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर और एग्जीक्यूशन

यह मास्टरक्लास अंडरलाइंग इंफ्रास्ट्रक्चर की भूमिका पर भी प्रकाश डालेगा। AI को बड़े पैमाने पर भरोसेमंद तरीके से काम करने के लिए कंपनियों को मजबूत कंप्यूटिंग पावर और डेटा सिस्टम्स की ज़रूरत होती है। NVIDIA जैसी कंपनियों के लीडर्स इन इनिशिएटिव्स को सपोर्ट करने के लिए ज़रूरी फाउंडेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पर बात करेंगे। अन्य सेशंस में AI-पावर्ड लॉजिस्टिक्स, वॉइस-बेस्ड कस्टमर सर्विस और फिजिकल सेटिंग्स में ऑटोनॉमस रोबोटिक्स जैसे टेंजिबल यूज-केस दिखाए जाएंगे। ये डेमोंस्ट्रेशन यह दिखाने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं कि प्रोडक्शन-ग्रेड टेक्नोलॉजी, शुरुआती लैब-बेस्ड एक्सपेरिमेंट्स से कैसे अलग होती है।

स्ट्रेटेजिक रिस्क और ऑपरेशनल चुनौतियां

AI को अपनाने से प्रोडक्टिविटी में सुधार की संभावना तो है, लेकिन इसके साथ जुड़े महत्वपूर्ण रिस्क भी हैं जिन्हें इन्वेस्टर्स को समझना चाहिए। एक बड़ी चिंता टेक्निकल इम्प्लीमेंटेशन और एक्चुअल बिज़नेस स्ट्रैटेजी के बीच का गैप है। अगर कंपनियां बिना किसी क्लियर इंटीग्रेशन प्लान के AI पर भारी खर्च करती हैं, तो उन्हें इनएफिशिएंट कॉस्ट एलोकेशन और सीमित प्रॉफिट गेन का रिस्क उठाना पड़ेगा। गवर्नेंस एक बड़ी रुकावट बनी हुई है, खासकर फाइनेंशियल और कंज्यूमर-फेसिंग कंपनियों के लिए जिन्हें सख्त डेटा प्राइवेसी और कंप्लायंस रेगुलेशंस को नेविगेट करना पड़ता है। इस मास्टरक्लास का गवर्नेंस और रिस्क मैनेजमेंट पर फोकस, इस बात को दर्शाता है कि बिज़नेस अपने इन्वेस्टमेंट्स से ऑपरेशनल फेलियर या रेगुलेटरी पेनल्टीज़ से बचने के लिए एक सतर्क अप्रोच अपना रहे हैं।

यह इवेंट इन कंपनियों के लिए इनोवेशन और कॉस्ट कंट्रोल को बैलेंस करने के अपने अनुभवों को शेयर करने का एक प्लेटफॉर्म प्रदान करता है। आने वाले महीनों के लिए मुख्य मॉनिटर करने वाली बात यह होगी कि ये फर्में अपने AI एक्सपेरिमेंट्स को लोअर ऑपरेशनल कॉस्ट, इम्प्रूव्ड सर्विस डिलीवरी और एन्हांस्ड प्रोडक्ट वैल्यू जैसे टेंजिबल बेनिफिट्स में कितनी प्रभावी ढंग से बदल पाती हैं, बजाय सिर्फ टेक्नोलॉजी पर ज़्यादा खर्च करने के।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.