AI इंफ्रास्ट्रक्चर में बंपर तेजी: डेटा सेंटर की दौड़ में ये 5 स्टॉक्स मालामाल!

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AuthorNeha Patil|Published at:
AI इंफ्रास्ट्रक्चर में बंपर तेजी: डेटा सेंटर की दौड़ में ये 5 स्टॉक्स मालामाल!

भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल से डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग रॉकेट की तरह बढ़ रही है। इस दौड़ में शामिल पांच बड़ी कंपनियां, हाई-परफॉरमेंस सर्वर से लेकर पावर सप्लाई तक, जबरदस्त ऑर्डर और रेवेन्यू ग्रोथ देख रही हैं। लेकिन, निवेशकों को इन स्टॉक्स की ऊंची वैल्यूएशन, प्रोजेक्ट्स को पूरा करने की चुनौती और टेक्नोलॉजी में तेजी से होने वाले बदलावों पर नजर रखनी होगी।

AI के लिए बन रहा 'डिजिटल प्लंबिंग'

भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का तेजी से विस्तार हो रहा है, और इसके लिए बड़े पैमाने पर फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत पड़ रही है। जहां पहले AI का ग्रोथ सॉफ्टवेयर पर केंद्रित था, वहीं अब असली हार्डवेयर, पावर और रियल एस्टेट बनाने की होड़ लगी है। इसी को देखते हुए, देश के AI भविष्य की 'डिजिटल प्लंबिंग' बनाने वाली पांच प्रमुख कंपनियों पर सबकी नजर है।

कंप्यूटिंग पावर का निर्माण

Netweb Technologies घरेलू AI ऑपरेशंस के लिए जरूरी हाई-परफॉरमेंस सर्वर बनाने में एक बड़ी खिलाड़ी बनकर उभरी है। दुनिया के बड़े चिप डिजाइनरों के साथ पार्टनरशिप के जरिए, यह कंपनी लोकल AI क्लस्टर बनाने में अहम भूमिका निभा रही है। फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में, Netweb का रेवेन्यू पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 172% बढ़कर ₹8.197 अरब हो गया। नेट प्रॉफिट भी बढ़कर ₹853 मिलियन हो गया। कंपनी ने हाल ही में ₹4,885.90 प्रति शेयर के फ्लोर प्राइस के साथ क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) लॉन्च किया है, ताकि अपनी उत्पादन क्षमता का और विस्तार कर सके।

E2E Networks भी इस ट्रेंड का फायदा उठा रही है, जो क्लाउड कंप्यूटिंग सर्विसेज ऑफर करती है। महंगे हार्डवेयर खरीदने के बजाय, कंपनियां अब इन रिसोर्सेज को किराए पर ले रही हैं। इस बदलाव ने कंपनी को प्रॉफिट में लाने में मदद की है। जून 2026 क्वार्टर में कंपनी का रेवेन्यू ₹1.5676 अरब और नेट प्रॉफिट ₹439 मिलियन रहा। हालांकि, कंपनी को लगातार अपने GPU क्लस्टर, जैसे कि लेटेस्ट Nvidia चिप्स, को अपग्रेड करने में निवेश करना होगा, क्योंकि यह हार्डवेयर बहुत जल्दी पुराना हो जाता है।

नींव: रियल एस्टेट और कनेक्टिविटी

Anant Raj, जो पारंपरिक रूप से एक रियल एस्टेट डेवलपर है, अब आक्रामक तरीके से डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर बढ़ रही है। कंपनी ने डेटा सेंटर बनाने के लिए जमीन और रिसोर्सेज हासिल कर लिए हैं, और 2032 तक 307 MW की क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। इस क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करने के लिए, बोर्ड ने अपने डेटा सेंटर और क्लाउड बिजनेस को Ashok Cloud Private Limited नाम की एक अलग कंपनी में डीमर्ज करने की मंजूरी दी है। इस डीमर्जर का मकसद वैल्यू अनलॉक करना है, लेकिन इस प्रोजेक्ट में भारी विस्तार की जरूरत होगी, जिस पर निवेशकों को संभावित डेट (कर्ज) के असर को ट्रैक करना होगा।

Sterlite Technologies और Hitachi Energy India आवश्यक सपोर्ट स्ट्रक्चर्स प्रदान कर रही हैं। Sterlite, जो ऑप्टिकल फाइबर बनाती है, ने जून 2026 क्वार्टर में ₹19.1 अरब का रेवेन्यू और ₹1.97 अरब का प्रॉफिट दर्ज किया। हाई-स्पीड डेटा सेंटर कनेक्टिविटी के लिए मिले बड़े कॉन्ट्रैक्ट्स के दम पर इसका ऑर्डर बुक ₹186 अरब पर खड़ा है। Hitachi Energy India इस बूम के पावर वाले हिस्से को संभाल रही है, डेटा सेंटर को चालू रखने के लिए ट्रांसफार्मर और ग्रिड लिंक की सप्लाई कर रही है। इसका ऑर्डर बैक लॉग रिकॉर्ड ₹322 अरब तक पहुंच गया। हालांकि, Hitachi का स्टॉक 150 के करीब प्राइस-टू-अर्निंग (PE) रेशियो के साथ ऊंची वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहा है, जो यह दर्शाता है कि बाजार भविष्य के प्रदर्शन से बहुत ज्यादा उम्मीदें लगाए बैठा है।

जोखिम और नजर रखने वाली बातें

AI इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में ग्रोथ तो है, लेकिन इसमें कुछ खास जोखिम भी हैं जिन्हें निवेशकों को समझना चाहिए। Hitachi और Netweb जैसी कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चिंता उनकी ऊंची मार्केट वैल्यूएशन है, जो कमाई में किसी भी कमी के लिए बहुत कम गुंजाइश छोड़ती है। इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में, पावर की उपलब्धता या ग्रिड कनेक्शन में देरी का जोखिम हो सकता है, जिससे रेवेन्यू जनरेशन में देरी हो सकती है। इसके अलावा, टेक्नोलॉजी में तेजी से बदलाव का मतलब है कि आज खरीदा गया हार्डवेयर कुछ ही सालों में पुराना हो सकता है, जिससे कंपनियों को अपने कैश को लगातार फिर से निवेश करना पड़ेगा। निवेशकों के लिए अगले महत्वपूर्ण कदम यह देखना होगा कि अशोक क्लाउड डीमर्जर कितनी तेजी से आगे बढ़ता है, Sterlite और Hitachi के ऑर्डर्स का निष्पादन कितनी जल्दी होता है, और डेटा सेंटर स्पेस में प्रतिस्पर्धा बढ़ने पर ये कंपनियां अपने प्रॉफिट मार्जिन को कैसे बनाए रख पाती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.