भारतीय टेक सेक्टर में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। **69%** प्रोफेशनल अब पारंपरिक IT कंपनियों के बजाय Global Capability Centres (GCCs) को प्राथमिकता दे रहे हैं। AI प्रोजेक्ट्स और बेहतर करियर ग्रोथ की चाह में हो रहा यह पलायन पुरानी IT कंपनियों के लिए रिटेंशन और मुनाफे का बड़ा रिस्क बन गया है।
भारत का तकनीकी परिदृश्य एक बड़े बदलाव से गुजर रहा है। Talent500 की रिपोर्ट के अनुसार, तकनीकी पेशेवरों का एक बड़ा हिस्सा अब पारंपरिक IT सर्विस कंपनियों से हटकर GCCs की ओर रुख कर रहा है।
AI की दौड़ और टैलेंट वॉर
इस पलायन के पीछे सबसे बड़ी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की स्किल्स हैं। रिपोर्ट बताती है कि 71% टेक कर्मचारी ऐसे रोल की तलाश में हैं जहां उन्हें AI पर काम करने का मौका मिले, लेकिन 30% से कम कंपनियों में ही यह सुविधा उपलब्ध है।
विशेष रूप से 12 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले वरिष्ठ पेशेवरों के बीच स्थिति और भी गंभीर है, जहां 91% लोग बेहतर ऑफर मिलने पर नौकरी बदलने के लिए तैयार हैं। पारंपरिक IT कंपनियों के लिए यह एक दोधारी तलवार है—उन्हें अनुभवी टैलेंट गंवाने का डर है और साथ ही रिटेंशन के लिए बढ़ता खर्चा उनके मार्जिन पर दबाव डाल रहा है।
GCC की रफ्तार और चुनौतियां
भारत में GCC का इकोसिस्टम 15% से 18% की सालाना दर से बढ़ रहा है। ये केंद्र वैश्विक कंपनियों के लिए इनोवेशन हब के रूप में काम कर रहे हैं। हालांकि, GCCs के सामने भी अपनी चुनौतियां हैं। सिर्फ 36% कर्मचारी ही वहां करियर के साफ रास्तों से संतुष्ट हैं, जबकि 87% पेशेवर करियर ग्रोथ को ही प्राथमिकता देते हैं।
निवेशकों के लिए संकेत
IT सेक्टर के निवेशकों को इस ट्रेंड पर बारीक नजर रखनी चाहिए। जो कंपनियां अपनी स्किल-बिल्डिंग प्रोग्राम्स में बदलाव नहीं कर पाएंगी, उनके एट्रिशन रेट (Attrition Rate) बढ़ने और खर्चों के चलते मार्जिन घटने का खतरा बना रहेगा। आगामी नतीजों में प्रबंधन की टिप्पणियों और AI ट्रेनिंग पर किए गए निवेश पर नजर रखना जरूरी होगा।
