भारतीय टेक सेक्टर में अब मोटी सैलरी का दौर पीछे छूट गया है। बड़ी कंपनियां AI में निवेश बढ़ाने और प्रॉफिट मार्जिन बचाने के लिए सैलरी हाइक पर सख्ती बरत रही हैं। लगभग **35%** कर्मचारियों को या तो जीरो हाइक मिली है या उनकी सैलरी में कटौती की गई है।
बीते कुछ वर्षों में टेक सेक्टर में जो डबल-डिजिट सैलरी ग्रोथ देखने को मिलती थी, उस पर अब पूरी तरह से ब्रेक लग चुका है। नए आंकड़ों के मुताबिक, करीब 35% टेक प्रोफेशनल्स को कोई इंक्रीमेंट नहीं मिला या उनकी सैलरी घट गई है, जबकि 60% कर्मचारियों को 5% या उससे कम की मामूली बढ़ोतरी मिली है।
मुनाफे के लिए खर्च में कटौती
इस सैलरी स्टैग्नेशन (Salary Stagnation) की मुख्य वजह कंपनियों का बदलता फोकस है। टेक कंपनियां अब अपना पैसा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और इंटरनल एफिशिएंसी टूल्स में लगा रही हैं। निवेशकों के नजरिए से देखें, तो यह एक शॉर्ट-टर्म ट्रेड-ऑफ है। कंपनियों का मानना है कि सैलरी ग्रोथ को सीमित करके वे अपने ऑपरेटिंग मार्जिन्स को बचा सकती हैं। यह कदम मुनाफे को सुरक्षित रखने के लिए तो ठीक है, लेकिन लंबे समय में कंपनी की ग्रोथ के लिए एक चुनौती बन सकता है।
कंपनियों की बदली रणनीति
इंडस्ट्री में हर कंपनी की रणनीति अलग है। Zoho और Microsoft जैसी कंपनियों में मुआवजे को लेकर काफी सख्त कंट्रोल देखा गया है, जहां कर्मचारियों को फ्लैट पे (Flat Pay) या बहुत सीमित इजाफा मिला है। वहीं, Nutanix जैसी कुछ कंपनियां अभी भी बेहतर इंक्रीमेंट दे रही हैं। यह साफ दिखाता है कि कंपनियां यह तय कर रही हैं कि किस टैलेंट को रिटेन करना है और कहां ऑटोमेशन का इस्तेमाल करना है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
सैलरी फ्रीज करने से तिमाही नतीजे (Quarterly Results) तो बेहतर दिख सकते हैं, लेकिन इसके बड़े रिस्क भी हैं। अगर अनुभवी टैलेंट कंपनी छोड़कर कॉम्पिटिटर्स के पास जाता है, तो भर्ती और ट्रेनिंग का खर्च बढ़ जाएगा, जो मार्जिन में हुई बचत पर भारी पड़ेगा। निवेशकों को आने वाली अर्निंग कॉल्स में 'एट्रिशन रेट' (Attrition Rate) और 'हायरिंग ट्रेंड्स' पर बारीक नजर रखनी चाहिए।
