Indian Tablet Market: लैपटॉप हुए महंगे तो टैबलेट की बिक्री **37%** उछली!

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Indian Tablet Market: लैपटॉप हुए महंगे तो टैबलेट की बिक्री **37%** उछली!

साल 2026 की शुरुआत में भारतीय टैबलेट मार्केट में **37%** की शानदार ग्रोथ दर्ज की गई है। इसकी मुख्य वजह लैपटॉप की कीमतों में आई तेजी है, जिसने ग्राहकों को बड़े और दमदार टैबलेट खरीदने के लिए प्रेरित किया है। हालांकि, प्रीमियम डिवाइस की बिक्री बढ़ी है, पर जानकारों का कहना है कि कंपोनेंट की लागत और सप्लाई की दिक्कतें साल के अंत तक बाजार पर असर डाल सकती हैं।

टैबलेट की क्यों बढ़ी मांग?

रिसर्च एजेंसी CMR के मुताबिक, जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में भारत में टैबलेट की शिपमेंट पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 37% बढ़ी है। यह दिखाता है कि भारतीय ग्राहक अब पर्सनल कंप्यूटिंग के लिए टैबलेट को ज्यादा अहमियत दे रहे हैं। लैपटॉप की कीमतें बढ़ने की वजह से हाई-स्पेसिफिकेशन वाले टैबलेट अब रोजमर्रा के कामों के लिए एक बेहतर विकल्प बनकर उभरे हैं।

AI की मांग और कंपोनेंट की कमी

इस ट्रेंड के पीछे की एक बड़ी वजह RAM और स्टोरेज जैसे जरूरी कंपोनेंट्स की ग्लोबल सप्लाई की कमी है। AI इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी मांग के चलते यह समस्या और बढ़ गई है। 2026 में लैपटॉप की कीमतों में अनुमानित 20% से 40% तक की बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में, कई खरीदार टैबलेट की ओर रुख कर रहे हैं, खासकर 10 इंच से बड़ी स्क्रीन वाले टैबलेट, जिनकी हिस्सेदारी अब कुल शिपमेंट का लगभग 90% हो गई है। इससे यह साफ है कि टैबलेट अब सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि प्रोडक्टिविटी और पढ़ाई-लिखाई के लिए भी एंट्री-लेवल लैपटॉप्स का एक मजबूत विकल्प बन गए हैं।

प्रीमियम सेगमेंट में बूम

मार्केट में प्रीमियमाइजेशन का दौर चल रहा है। पहले क्वार्टर में ₹20,000 से ऊपर के डिवाइस की बिक्री कुल शिपमेंट का 86% रही। 6GB और 12GB RAM वाले टैबलेट्स में ग्राहकों की दिलचस्पी बढ़ी है। Apple, Samsung, Lenovo और Xiaomi जैसी बड़ी कंपनियों के लिए चुनौती यह है कि वे इस ग्रोथ को प्रोडक्शन की बढ़ती लागत के साथ कैसे बैलेंस करें। लागत कम करने और सप्लाई बनाए रखने के लिए ये कंपनियां अब लोकल मैन्युफैक्चरिंग पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं।

आगे क्या?

साल की दमदार शुरुआत के बावजूद, भविष्य को लेकर थोड़ी सावधानी बरती जा रही है। कुछ रिसर्च फर्मों ने मामूली ग्रोथ का अनुमान लगाया है, वहीं CMR जैसी फर्मों का मानना है कि 2026 कैलेंडर ईयर में टैबलेट की बिक्री 10% से 12% तक गिर सकती है। इसका मुख्य कारण इकोनॉमी की चिंताएं हैं, जहां कंपोनेंट की लागत में लगातार बढ़ोतरी ग्राहकों की मांग को कम कर सकती है। मैन्युफैक्चरर्स के सामने अब प्रॉफिट मार्जिन बनाए रखते हुए सप्लाई चेन की दिक्कतों से निपटना एक बड़ी चुनौती है।

आगे चलकर, यह देखना दिलचस्प होगा कि टैबलेट और पारंपरिक कंप्यूटर के बीच का अंतर कम होता है या कंपोनेंट सप्लाई सुधरने पर मांग स्थिर होती है। मैन्युफैक्चरर्स की किफायती डिवाइस बनाने की क्षमता, त्योहारी सीजन में असली कंज्यूमर डिमांड और टैबलेट के प्रोडक्टिविटी फीचर्स कितने लोगों को लैपटॉप की जगह लेने में कामयाब होते हैं, इन बातों पर सबकी नजरें रहेंगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.