Indian Tablet Market: मेमोरी चिप के महंगे दाम से मार्केट सुस्त, टैबलेट बिक्री में **3.8%** की गिरावट

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Indian Tablet Market: मेमोरी चिप के महंगे दाम से मार्केट सुस्त, टैबलेट बिक्री में **3.8%** की गिरावट

साल **2026** की दूसरी तिमाही में भारत में टैबलेट शिपमेंट में **3.8%** की गिरावट देखी गई है। मेमोरी चिप्स की लागत बढ़ने से कंपनियों ने कीमतें बढ़ाई हैं, जिसका सीधा असर एंट्री-लेवल मार्केट पर पड़ा है, जो **43%** तक टूट गया है।

प्रीमियम डिवाइसेस का दबदबा

बाजार अब साफ तौर पर दो हिस्सों में बंटता दिख रहा है। ₹20,000 से कम कीमत वाले टैबलेट्स, जो कभी मार्केट की वॉल्यूम बढ़ाते थे, उनकी सप्लाई में 43% की भारी गिरावट आई है। कंपनियों द्वारा लागत संभालने के लिए कीमतें बढ़ाने के कारण इंडस्ट्री में औसत सेलिंग प्राइस 15% तक बढ़ गया है। वहीं दूसरी ओर, ₹20,000 से महंगे प्रीमियम टैबलेट्स ने 27% की ग्रोथ दर्ज की है और अब इनका मार्केट शेयर 74% तक पहुंच चुका है। ग्राहक अब छोटी स्क्रीन के बजाय 12 इंच से बड़ी स्क्रीन वाले प्रोडक्टिविटी टूल्स को ज्यादा पसंद कर रहे हैं।

घरेलू मैन्युफैक्चरिंग में तेजी

कुल शिपमेंट में कमी के बावजूद, भारत में टैबलेट मैन्युफैक्चरिंग 30% (YoY) बढ़ी है। Samsung और Lenovo जैसी दिग्गज कंपनियां अपनी सप्लाई चेन को लोकलाइज कर रही हैं। यह कदम न केवल सरकारी इंसेंटिव्स का फायदा उठाने के लिए है, बल्कि बाहरी लागत के दबाव से बचने की एक बड़ी रणनीति भी है।

निवेशकों के लिए चेतावनी

निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रीमियम उत्पादों पर यह फोकस भविष्य में भी मुनाफे को बरकरार रख पाएगा। आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती डिमांड के कारण हाई-बैंडविड्थ मेमोरी चिप्स की कमी 2027-2028 तक जारी रह सकती है, जिससे इनपुट कॉस्ट में दबाव बना रहेगा। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि एंट्री-लेवल सेगमेंट में आई कमजोरी की भरपाई करना कंपनियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.