भारतीय छात्र का AI में करियर: Amazon में ₹1.5 करोड़ की नौकरी!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
भारतीय छात्र का AI में करियर: Amazon में ₹1.5 करोड़ की नौकरी!

IIIT Dharwad के ग्रेजुएट आदित्य अरेपल्ली ने भारत में ₹13 लाख की नौकरी छोड़कर अमेरिका में AI में मास्टर्स किया और अब Amazon Web Services में ₹1.5 करोड़ की जॉब पाई है। यह कदम AI टैलेंट को ग्लोबल टेक कंपनियां कितना महत्व दे रही हैं, इसे दर्शाता है।

AI एक्सपर्ट्स की है भारी डिमांड!

एक भारतीय टेक प्रोफेशनल के करियर में आए इस बड़े बदलाव ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की ग्लोबल डिमांड को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। IIIT Dharwad के एलुमनाई आदित्य अरेपल्ली, जो पहले Riverbed Technology में ₹13 लाख के सालाना पैकेज पर सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे, अब अमेरिका की University at Buffalo से AI में मास्टर्स डिग्री लेने के बाद Amazon Web Services (AWS) में नौकरी कर रहे हैं।

₹1.5 करोड़ का पैकेज, लेकिन पूरी कहानी?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिएटल स्थित AWS में आदित्य की सैलरी ₹1.5 करोड़ सालाना बताई जा रही है। टेक जॉब मार्केट के जानकारों का कहना है कि यह बदलाव दिखाता है कि आजकल जनरल सॉफ्टवेयर रोल्स और AI जैसे स्पेशलाइज्ड फील्ड्स के बीच सैलरी में कितना बड़ा अंतर आ गया है।

लेकिन, इस बड़ी सैलरी पैकेज को समझना भी ज़रूरी है। Amazon जैसी बड़ी अमेरिकी टेक कंपनियों में सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग रोल्स के लिए 'टोटल कंपनसेशन' (TC) में सिर्फ बेसिक सैलरी ही नहीं, बल्कि सालाना परफॉरमेंस बोनस और रेस्ट्रिक्टेड स्टॉक यूनिट्स (RSUs) भी शामिल होते हैं। ये स्टॉक यूनिट्स कंपनी के शेयर के प्रदर्शन के हिसाब से घटते-बढ़ते रहते हैं, यानी असली कमाई बाजार के उतार-चढ़ाव और कंपनी के अपने नियमों पर निर्भर करती है।

Big Tech कंपनियों का AI पर दांव

निवेशकों और मार्केट एनालिस्ट्स के लिए, AI रोल्स पर इतना ज्यादा खर्च करना टेक कंपनियों की एक स्ट्रैटेजिक चाल है। Amazon, Microsoft और Google जैसी कंपनियां जेनेरेटिव AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर डिवीजन्स को बढ़ावा देने के लिए टैलेंट के पीछे भाग रही हैं। हालांकि, इससे इनोवेशन और प्रोडक्ट डेवलपमेंट तो बढ़ रहा है, पर कंपनी के खर्च भी बढ़ रहे हैं, खासकर एम्प्लॉयी स्टॉक कंपनसेशन और RSU डाइल्यूशन के रूप में। शेयरहोल्डर्स इन मेट्रिक्स पर हमेशा बारीकी से नजर रखते हैं।

यह मामला भारतीय टेक प्रोफेशनल्स के बीच एक बड़े ट्रेंड को भी दिखाता है: अमेरिका में महंगी और स्पेशलाइज्ड एजुकेशन लेना, ताकि टॉप टेक फर्मों में हाई-वैल्यू रोल्स मिल सकें। जैसे-जैसे कंपनियां अपने बिजनेस मॉडल्स में AI को इंटीग्रेट कर रही हैं, वैसे-वैसे उन इंजीनियर्स की डिमांड और वैल्यू बढ़ने की उम्मीद है, जिनके पास मशीन लर्निंग की थ्योरी और प्रैक्टिकल प्रोडक्ट डेवलपमेंट स्किल्स, दोनों हों। यह देखना अहम होगा कि यह भारी निवेश Big Tech सेक्टर के लिए आने वाले सालों में सस्टेनेबल रेवेन्यू ग्रोथ और बेहतर प्रॉफिट मार्जिन में तब्दील होता है या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.