अमेरिका द्वारा चीन पर लगाए गए प्रतिबंधों के बाद, भारत की Addverb Technologies, Ati Robotics और Novus जैसी रोबोटिक्स कंपनियां अपनी AI क्षमताओं का विस्तार कर रही हैं ताकि वैश्विक बाजार में अपनी जगह बना सकें। 2030 तक वैश्विक क्षेत्र के $100 बिलियन से अधिक होने का अनुमान है, ये कंपनियां वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भरोसेमंद विकल्पों के रूप में खुद को स्थापित कर रही हैं।
भारतीय स्टार्टअप्स का $100 अरब डॉलर के AI रोबोट बाजार पर कब्जा
अमेरिकी सरकार द्वारा चीन से होने वाले रोबोट आयात पर कड़े नियम लागू करने के बाद, भारत की टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स दुनिया भर में AI-संचालित फिजिकल रोबोट्स के बाजार में अपनी पैठ बनाने के लिए तैयार हैं। यह बाजार 2030 तक $100 बिलियन के पार जाने की उम्मीद है। इस रणनीतिक बदलाव से Addverb Technologies, Ati Robotics और Novus जैसी भारतीय कंपनियां वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भरोसेमंद विकल्प बनकर उभर रही हैं।
Addverb Technologies का विस्तार प्लान
रिलायंस रिटेल वेंचर्स के बहुमत स्वामित्व वाली Addverb Technologies, अपने ह्यूमनाइड (मानव-जैसे) और क्वाड्रुपेड (चार पैर वाले) रोबोट प्रोटोटाइप के विकास में तेजी लाने के लिए $100 मिलियन से अधिक का नया फंड जुटाने की कोशिश कर रही है। कंपनी का लक्ष्य मार्च 2027 में समाप्त होने वाले फाइनेंशियल ईयर तक लाभप्रदता हासिल करना है। Addverb इन रोबोट्स का औद्योगिक और रक्षा क्षेत्र में परीक्षण कर रही है और अपने मौजूदा वैश्विक कार्यालयों का उपयोग करके निर्यात बढ़ाने का इरादा रखती है।
'चाइना प्लस वन' रणनीति का फायदा
दुनिया भर के देश अब 'चाइना प्लस वन' रणनीति अपना रहे हैं, यानी चीन के अलावा अन्य भरोसेमंद सप्लायर्स की तलाश कर रहे हैं। हालांकि भारतीय रोबोटिक्स सेक्टर अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन यहां की कंपनियां अपने कोर बिजनेस के रूप में प्रोप्राइटरी सॉफ्टवेयर, जैसे कि परसेप्शन, नेविगेशन और निर्णय लेने वाले सिस्टम पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। गुरुग्राम स्थित Novus High-Tech Robotic इसी सॉफ्टवेयर-केंद्रित दृष्टिकोण पर काम कर रही है, जबकि बेंगलुरु स्थित Ati Robotics उत्तरी अमेरिकी बाजार की सेवा के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका में एक विनिर्माण संयंत्र स्थापित करके अपना विस्तार कर रही है।
जोखिम और बाजार की चुनौतियां
मौका भले ही बड़ा हो, लेकिन निवेशकों को इसमें शामिल बड़े जोखिमों को भी समझना होगा। एडवांस्ड रोबोटिक्स का निर्माण और विस्तार अत्यधिक पूंजी-गहन (capital-intensive) है, जिसके लिए अनुसंधान और विनिर्माण सेटअप में भारी निवेश की आवश्यकता होती है। ये कंपनियां जापान, अमेरिका और चीन के स्थापित खिलाड़ियों के प्रभुत्व वाले बाजार में प्रवेश कर रही हैं, जिन्हें वर्षों का अनुभव, बड़े पैमाने की अर्थव्यवस्थाएं और सरकारी समर्थन प्राप्त है।
इसके अलावा, तकनीक में विफलता या देरी का उच्च जोखिम भी है। जटिल वातावरण में मज़बूती से काम करने वाले सुरक्षा-महत्वपूर्ण ह्यूमनाइड रोबोट विकसित करना एक कठिन इंजीनियरिंग चुनौती है। निवेशकों को यह देखना होगा कि ये स्टार्टअप अपने उच्च पूंजीगत व्यय का प्रबंधन कैसे करते हैं और क्या वे अपने प्रोटोटाइप को विश्वसनीय, व्यावसायिक रूप से तैयार उत्पादों में सफलतापूर्वक बदल पाते हैं। नकदी प्रवाह के दबाव के बिना इन महत्वाकांक्षी योजनाओं को क्रियान्वित करने की क्षमता इन फर्मों की दीर्घकालिक सफलता के लिए महत्वपूर्ण होगी।
