भारत का एंटरटेनमेंट सेक्टर अब AI-बेस्ड आइडेंटिटी लाइसेंसिंग की ओर तेजी से बढ़ रहा है। सितारे अब अपने डिजिटल क्लोन (Digital Replicas) से कमाई कर रहे हैं, जो **₹6,500 करोड़** से भी बड़े बाजार के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो रहा है।
कमाई का नया डिजिटल जरिया
भारत में सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट का बाजार करीब ₹3,000 करोड़ का है, जबकि इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग सेक्टर ₹3,500 करोड़ का आंकड़ा पार कर चुका है। अब AI क्लोनिंग ने इस खेल को पूरी तरह बदल दिया है। पहले ब्रांड्स को शूटिंग के लिए सितारों की मौजूदगी चाहिए होती थी, लेकिन अब उनका डिजिटल 'लुक्स' और 'आवाज' का इस्तेमाल करके कहीं से भी और कभी भी कंटेंट तैयार किया जा सकता है।
नई टेक-इन्फ्रास्ट्रक्चर का उदय
इस बदलाव को मैनेज करने के लिए कई प्लेटफॉर्म्स सामने आए हैं। Studio Blo ने FAIMOUS नाम का एक प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है, जो सेलिब्रिटी लाइसेंसिंग और IP राइट्स के कानूनी ढांचे को संभालता है। इसके अलावा, सितंबर 2026 में Sparkonomy ने Open Creator Graph पेश किया। यह एक ऐसा ओपन इंफ्रास्ट्रक्चर है, जहां सितारे खुद तय कर सकते हैं कि उनके AI क्लोन का इस्तेमाल कहां 'Allowed' होगा और कहां 'Prohibited'।
बड़े सितारों की एंट्री
क्रिकेट की दुनिया के बड़े नाम जैसे Hardik Pandya और Shubman Gill पहले ही इन AI टूल्स के साथ प्रयोग शुरू कर चुके हैं। ये सितारे अब खुद तय करते हैं कि उनका डिजिटल अवतार किस तरह के ब्रांड्स के साथ जुड़ सकता है, जिससे उनकी पर्सनल ब्रांडिंग सुरक्षित रहती है।
जोखिम और चुनौतियां
हालांकि, यह सब आसान नहीं है। सबसे बड़ा खतरा 'डीपफेक' (Deepfakes) का है, जो किसी भी सितारे की इमेज को नुकसान पहुंचा सकता है। इन कानूनी और नैतिक सीमाओं के कारण भारत में IT रूल्स और डेटा सुरक्षा को लेकर नियामक (Regulatory) दबाव भी बढ़ता जा रहा है। निवेशकों के लिए यह देखना दिलचस्प होगा कि ये प्लेटफॉर्म्स सुरक्षा और коммер्सियल ग्रोथ के बीच कैसे तालमेल बिठाते हैं।
