Indian Smartphone Sales: चिप की महंगाई ने बढ़ाई मुसीबत, बिक्री में आई बड़ी गिरावट

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Indian Smartphone Sales: चिप की महंगाई ने बढ़ाई मुसीबत, बिक्री में आई बड़ी गिरावट

भारतीय स्मार्टफोन मार्केट में जुलाई की ई-कॉमर्स सेल के बाद से बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। कंपोनेंट की बढ़ती कीमतों के चलते कंपनियों को फोन की कीमतें बढ़ानी पड़ रही हैं, जिसका असर बिक्री पर साफ दिख रहा है। खास तौर पर मास-मार्केट सेगमेंट में ग्राहकों की ओर से फोन अपग्रेड में देरी देखने को मिल रही है।

क्यों आई बिक्री में कमी?

दरअसल, जुलाई में हुई बड़ी ई-कॉमर्स सेल के दौरान भविष्य की मांग को पूरा कर लिया गया था। सेल खत्म होते ही बाजार में सन्नाटा पसर गया। ऐसे में, यह साफ है कि ग्राहक अब डिस्काउंट पर ही फोन खरीदने को तरजीह दे रहे हैं, न कि सामान्य खरीददारी कर रहे हैं।

चिप की महंगाई का असर

इस मंदी का सबसे बड़ा कारण है कंपोनेंट की बढ़ती कीमतें। AI डेटा सेंटर्स की बढ़ती मांग के चलते मेमोरी चिप्स, जैसे DRAM और NAND की ग्लोबल सप्लाई में भारी कमी आई है। इससे मैन्युफैक्चरिंग का खर्च बढ़ गया है। मुनाफा बनाए रखने के लिए, स्मार्टफोन ब्रांड्स ने ये बढ़ी हुई कीमतें ग्राहकों पर डाल दी हैं। 2026 के दौरान कई कंपनियों ने लगातार दाम बढ़ाए हैं, जिसका सबसे बुरा असर एंट्री-लेवल और मिड-रेंज फोन पर पड़ा है।

प्रीमियम सेगमेंट में राहत, मास-मार्केट में गिरावट

कीमतों के इस दबाव के चलते बाजार दो हिस्सों में बंट गया है। मास-मार्केट सेगमेंट, जो अब तक सबसे ज्यादा शिपमेंट का गढ़ रहा है, में सबसे बड़ी गिरावट देखी जा रही है। वहीं, ₹25,000 से ऊपर के प्रीमियम सेगमेंट में स्थिति फिलहाल ठीक है। इस सेगमेंट की ग्रोथ को जीरो-कॉस्ट EMI जैसे फाइनेंसिंग ऑप्शन्स का सहारा मिल रहा है, जो ग्राहकों को महंगाई के बावजूद महंगे फोन खरीदने में मदद कर रहे हैं।

अब कब बदलेंगे लोग फोन?

ग्राहकों का व्यवहार भी बदल रहा है। अब लोग अपने फोन को औसतन 4 साल तक इस्तेमाल कर रहे हैं। जो कंपनियां कम कीमत वाले फोन की हाई-वॉल्यूम बिक्री पर निर्भर करती हैं, उनके लिए यह एक बड़ी चुनौती है। इससे नई खरीद की फ्रीक्वेंसी कम हो गई है और कुल मार्केट साइज घट गया है।

आगे की राह?

2026 के बाकी हिस्से के लिए इंडस्ट्री के सामने एक मुश्किल तस्वीर है। मेमोरी कंपोनेंट की शॉर्टेज कम से कम 2027 के मध्य तक जारी रहने की उम्मीद है। ऐसे में, मैन्युफैक्चरर्स को बिक्री वॉल्यूम बनाए रखने और प्रोडक्शन कॉस्ट को कवर करने के बीच संतुलन साधना होगा। आने वाले फेस्टिव सीजन के नतीजों पर निवेशकों की नजरें होंगी, क्योंकि इससे पता चलेगा कि क्या ग्राहक मांग में सुधार होता है या फिर मौजूदा धीमी रफ्तार और लंबे अपग्रेड साइकिल का दौर जारी रहता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.