Indian SMBs: साइबर अपराधियों का नया जाल, बैकडोर हमलों में **52%** की खतरनाक बढ़ोतरी

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Indian SMBs: साइबर अपराधियों का नया जाल, बैकडोर हमलों में **52%** की खतरनाक बढ़ोतरी

साल 2026 की पहली छमाही में भारतीय स्मॉल और मीडियम बिजनेस (SMBs) पर बैकडोर मैलवेयर हमलों में **52%** का बड़ा उछाल आया है, जो कुल **4.52 लाख** घटनाओं तक पहुंच गया है।

भारतीय स्मॉल और मीडियम बिजनेस (SMBs) के लिए साइबर सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। साल 2026 की पहली छमाही के आंकड़ों के मुताबिक, बैकडोर मैलवेयर हमलों में 52.1% की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। ये हमले इतने शातिर हैं कि ये सुरक्षा घेरे को चकमा देकर नेटवर्क में लंबे समय तक छिपे रहते हैं और डेटा चोरी का बड़ा खतरा पैदा करते हैं।\n\nरिपोर्ट्स के अनुसार, इस दौरान लगभग 4.52 लाख संदिग्ध घटनाएं दर्ज की गईं। दिलचस्प बात यह है कि जहां पारंपरिक हमलों जैसे RDP (Remote Desktop Protocol) में 26.3% और सॉफ्टवेयर एक्सप्लॉइट्स में 35.1% की गिरावट आई है, वहीं बैकडोर हमलों का बढ़ना यह साफ इशारा है कि अब हैकर्स पुरानी तकनीक छोड़कर अधिक गुप्त और खतरनाक तरीकों को अपना रहे हैं।\n\nइस बीच, CERT-In ने AI-ड्रिवन एजेंट्स और PHP एप्लीकेशन्स में सुरक्षा खामियों को लेकर चेतावनी जारी की है। इसके अलावा, eMudhra से जुड़े प्राइवेट की (Private Keys) के साथ समझौते के बाद इंडस्ट्री में ऑथेंटिकेशन सर्टिफिकेट्स की दोबारा जांच शुरू हो गई है।\n\n### निवेशकों के लिए सबक (Investment Insight)\n\nयह रुझान बताता है कि साइबर सुरक्षा अब एक विकल्प नहीं बल्कि 'ऑपरेशनल जरूरत' बन गई है। जो कंपनियां खुद सुरक्षा में निवेश नहीं कर सकतीं, वे अब Managed Security Service Providers (MSSPs) की मदद ले रही हैं। इससे उन IT और सॉफ्टवेयर कंपनियों के लिए बड़े मौके बन रहे हैं, जो मॉनिटरिंग, पैचिंग और ऑटोमेटेड थ्रेट डिटेक्शन जैसी सेवाएं देती हैं। आने वाले समय में साइबर सिक्योरिटी पर कंपनियों का बजट आवंटन बढ़ना तय है, जिस पर निवेशकों को नजर रखनी चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.