AI Adoption: भारत में छोटी कंपनियां मार रहीं बाजी, बड़ी कॉर्पोरेट रह गईं पीछे!

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AuthorAditya Rao|Published at:
AI Adoption: भारत में छोटी कंपनियां मार रहीं बाजी, बड़ी कॉर्पोरेट रह गईं पीछे!

Salesforce के नए डेटा के मुताबिक, भारत में छोटी और मध्यम कंपनियां (SMBs) बड़ी कंपनियों के मुकाबले कहीं तेजी से AI को अपना रही हैं। हालांकि, हाई इम्प्लीमेंटेशन कॉस्ट और मुनाफे में इसका सीधा असर न दिखना निवेशकों के लिए चिंता का विषय है।

छोटी कंपनियों की रफ्तार के पीछे की वजह

Salesforce की रिपोर्ट बताती है कि छोटी कंपनियों में फैसला लेने की प्रक्रिया काफी लचीली होती है, जिससे वे बिना किसी बड़े अप्रूवल प्रोसेस के नई तकनीक को तुरंत टेस्ट कर सकती हैं। वहीं, बड़ी कंपनियां अक्सर सुरक्षा मानकों और इंटरनल तालमेल न बैठने के कारण पिछड़ जाती हैं।

ROI और लागत की चुनौती

तेजी से AI अपनाने के बावजूद, छोटी कंपनियों के सामने सबसे बड़ा सवाल 'रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट' (ROI) का है। AI सिस्टम की कुल लागत—जैसे प्लेटफॉर्म फीस, एक्सपर्ट्स की हायरिंग और मेंटेनेंस—काफी ज्यादा है। भारतीय बाजार में जहां लेबर कॉस्ट कम है, वहां AI से मिलने वाला फायदा केवल एफिशिएंसी बढ़ाने तक सीमित नहीं रह सकता। अगर यह सीधे रेवेन्यू ग्रोथ में नहीं बदलता, तो छोटी कंपनियों के लिए इसे लंबे समय तक जारी रखना मुश्किल होगा।

IT सेक्टर के लिए संकेत

बड़ी कंपनियां आज भी 'लिगेसी डेट' (पुराने और जटिल सॉफ्टवेयर) की समस्या से जूझ रही हैं। Tata Consultancy Services, Infosys और HCL Tech जैसी कंपनियां जनरेटिव AI सॉल्यूशंस बेच तो रही हैं, लेकिन ग्राहकों के स्तर पर इंटीग्रेशन अभी भी केवल 'पायलट टेस्टिंग' तक ही सिमटा हुआ है।

निवेशकों के लिए जरूरी बात

फिलहाल बाजार में 'इनोवेशन थिएटर' का दौर है, जहां कंपनियां सिर्फ आधुनिक दिखने के लिए AI का इस्तेमाल कर रही हैं। निवेशकों को अब इस पर नजर रखनी होगी कि कौन सी कंपनी AI को वास्तविक मुनाफे (Bottom-line impact) में बदल पा रही है। सिर्फ पायलट प्रोजेक्ट्स की संख्या देखकर फैसला लेने के बजाय, यह देखें कि क्या यह तकनीक कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ में ठोस योगदान दे रही है या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.