Indian IT Stocks में तूफानी तेजी, ग्लोबल टेक मार्केट में गिरावट

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AuthorNeha Patil|Published at:
Indian IT Stocks में तूफानी तेजी, ग्लोबल टेक मार्केट में गिरावट

मंगलवार को भारतीय IT कंपनियों TCS और Infosys के शेयरों में उछाल देखा गया। यह उछाल तब आया जब वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर स्टॉक्स में आई अस्थिरता के कारण बड़ी गिरावट दर्ज की गई। जहाँ एक ओर अंतरराष्ट्रीय टेक मार्केट में नई प्रतिस्पर्धा को लेकर चिंताएं बढ़ीं, वहीं भारत के घरेलू फैक्टर और संस्थागत खरीदारों (Institutional Buyers) ने भारतीय शेयरों को सहारा दिया।

Detailed Coverage

ग्लोबल सेमीकंडक्टर की उठापटक का असर

मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत मिली-जुली लेकिन मजबूत रही। शुरुआती कारोबार में Nifty 50 और Sensex दोनों में 0.16% की बढ़त दर्ज की गई। यह तेजी वैश्विक बाजारों के बिल्कुल उलट थी, जहाँ सेमीकंडक्टर सेक्टर में बड़ी उथल-पुथल के बाद भारी बिकवाली देखी गई।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चिंता की मुख्य वजह चीन की कंपनी ChangXin Memory Technologies (CXMT) का शंघाई स्टार मार्केट पर डेब्यू था। कंपनी के शेयरों में लगभग 500% का उछाल आया, जिससे इसका वैल्यूएशन $540 बिलियन तक पहुँच गया। निवेशकों को डर है कि इससे स्थापित वैश्विक टेक कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है, जिसके चलते प्रमुख सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली शुरू हो गई। इसका असर Philadelphia Semiconductor Index पर भी दिखा, जो 4.2% गिर गया। एशिया के प्रमुख सूचकांकों में भी तेज गिरावट आई, साउथ कोरिया का KOSPI 7% से ज्यादा और जापान का Nikkei 225 3% से ज्यादा लुढ़क गया।

भारतीय IT सेक्टर का अलग प्रदर्शन

इस वैश्विक गिरावट के बावजूद, भारत की प्रमुख IT कंपनियां Nifty 50 में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली कंपनियों में शामिल रहीं। Tata Consultancy Services (TCS) के शेयर 3.03% बढ़कर ₹2,365.20 पर पहुँच गए, जबकि Infosys के शेयर 2.64% चढ़कर ₹1,107.70 पर कारोबार कर रहे थे। Tech Mahindra और HCL Technologies जैसी अन्य बड़ी IT कंपनियों के शेयरों में भी 1.8% से ज्यादा की बढ़त देखी गई। यह दिखाता है कि निवेशक फिलहाल भारतीय IT सेवाओं को वैश्विक हार्डवेयर और सेमीकंडक्टर-केंद्रित कंपनियों से अलग मान रहे हैं, जो मेमोरी चिप मार्केट में नई प्रतिस्पर्धा से सीधे तौर पर प्रभावित हैं।

घरेलू संकेतकों का सहारा

क्षेत्रीय उतार-चढ़ाव के अलावा, कई घरेलू मैक्रोइकॉनॉमिक कारक भारतीय इक्विटी को सहारा दे रहे हैं। हालाँकि फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) की बिकवाली जारी है, लेकिन डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) सक्रिय खरीदार बने हुए हैं, जो बाजार को संतुलित रखने में मदद कर रहे हैं। बाजार की अस्थिरता को मापने वाले India VIX में लगभग 10% की गिरावट आकर 12.66 पर आ जाने से भी राहत मिली है। इसके अतिरिक्त, कच्चे तेल की कीमतों में $80.99 प्रति बैरल तक की कमी और भारतीय रुपये का मजबूत होना, जो डॉलर के मुकाबले 95.91 पर पहुँच गया, ने घरेलू बाजार के लिए एक स्थिर परिदृश्य बनाने में योगदान दिया है। बैंकिंग सेक्टर में मजबूत क्रेडिट ग्रोथ और ऑटोमोबाइल जैसे घरेलू उद्योगों में स्वस्थ वॉल्यूम ग्रोथ भी भारतीय बाजार को मजबूत करने वाले मुख्य फंडामेंटल पिलर बने हुए हैं।

निवेशकों के लिए, बाजार की अगली चाल इस बात पर निर्भर करेगी कि Nifty 50 अपने सपोर्ट लेवल को बनाए रख पाता है या नहीं। बाजार विश्लेषक फिलहाल 23,800 के स्तर को एक महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन मान रहे हैं। यदि इंडेक्स इस स्तर से ऊपर बना रहता है, तो मौजूदा रिकवरी रैली 24,100 से 24,200 के रेजिस्टेंस रेंज को टारगेट करने का प्रयास कर सकती है। यह समझना महत्वपूर्ण होगा कि क्या भारतीय IT शेयरों और वैश्विक टेक के बीच यह अंतर बना रहता है, जिसके लिए संस्थागत खरीदारों के पैटर्न और वैश्विक सेमीकंडक्टर की कीमतों पर आगे के अपडेट्स पर नजर रखनी होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.