भारतीय शेयर बाजार में एक बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। ग्लोबल निवेशक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर फोकस वाले स्टॉक्स से पैसा निकालकर भारतीय इक्विटी में लगा रहे हैं। जुलाई में Nifty IT इंडेक्स **16.7%** चढ़ गया, जिसने ग्लोबल चिपमेकर्स को पीछे छोड़ दिया। अब सबकी नज़रें कंपनियों के नतीजों और करेंसी की स्थिरता पर हैं।
AI से मोहभंग, अब भारतीय बाजार पर दांव
दुनिया भर के बड़े निवेशक अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर फोकस वाले स्टॉक्स से अपना पैसा निकाल रहे हैं। इस पैसे का एक बड़ा हिस्सा अब भारतीय शेयर बाजार की ओर मुड़ रहा है। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब भारतीय इक्विटी पिछले एक साल से टेक-केंद्रित रैली में पिछड़ रही थी।
IT सेक्टर में तूफानी तेजी
इस बड़े बदलाव का सबसे ज़्यादा फायदा भारतीय आईटी सेक्टर को मिला है। जुलाई के महीने में, Nifty IT इंडेक्स ने 16.7% का शानदार रिटर्न दिया है। इसकी तुलना में, फिलाडेल्फिया सेमीकंडक्टर इंडेक्स इसी दौरान 21% तक गिर गया। एनालिस्ट्स का मानना है कि यह भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनियों के लिए एक बड़ा मौका है, जिन्हें पहले AI बूम से सीधे तौर पर ज़्यादा फायदा न होने के कारण दबाव झेलना पड़ रहा था।
ब्रोकरेज फर्मों का बदला नज़रिया
सिर्फ आईटी ही नहीं, बल्कि भारतीय बाजार को लेकर भी ग्लोबल फाइनेंशियल फर्मों का नज़रिया बदल गया है। HSBC और UBS जैसी बड़ी फर्मों ने भारतीय इक्विटी पर अपनी रेटिंग्स को 'लो' से बढ़ाकर 'न्यूट्रल' या 'अट्रैक्टिव' कर दिया है। Goldman Sachs और Bernstein जैसी फर्मों को भी उम्मीद है कि Nifty 50 इंडेक्स साल की दूसरी छमाही में वापसी करेगा।
विदेशी निवेश और डोमेस्टिक फैक्टर
निवेशकों की बदली हुई सोच का असर कैपिटल फ्लो में भी दिख रहा है। 2026 की पहली छमाही में करीब $29 बिलियन की नेट सेलिंग के बाद, जुलाई में विदेशी निवेशकों ने $1.6 बिलियन से ज़्यादा का निवेश करके भारतीय इक्विटी बाजार में वापसी की है। इस वापसी के पीछे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के रुपये को स्थिर करने के कदम और कंपनियों के मुनाफे (Profitability) में सुधार की उम्मीद जैसे डोमेस्टिक कारण भी हैं।
आगे क्या?
फिलहाल बाजार में तेजी तो दिख रही है, लेकिन यह जारी रहेगी या नहीं, यह आने वाली तिमाही नतीजों पर निर्भर करेगा। इसके अलावा, निवेशक मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक(Geopolitical) हालात पर भी नज़र बनाए हुए हैं, क्योंकि तेल की कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अहम हैं। Amundi जैसे एसेट मैनेजरों का कहना है कि तेल की कीमतों का असर अभी से मार्केट वैल्यूएशन में दिख रहा है, लेकिन आने वाले महीनों में भारतीय कंपनियों की असली ग्रोथ ही संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) का भरोसा तय करेगी।
