भारतीय IT सेक्टर पर दबाव बढ़ता दिख रहा है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने IT कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी घटाकर करीब **5.6%** कर दी है, जो कि 2012 के बाद का सबसे निचला स्तर है। साथ ही, डेरिवेटिव्स मार्केट में भारी शॉर्ट-सेलिंग (Bearish Bets) देखी जा रही है। अब निवेशकों की नजरें आने वाले तिमाही नतीजों पर टिकी हैं।
भारी बिकवाली का दबाव
भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (IT) सेक्टर इस मौजूदा अर्निंग सीजन में काफी दबाव में है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने लगातार IT कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी कम की है। NSDL के ताजा आंकड़ों के अनुसार, IT सेक्टर में कुल निवेश घटकर लगभग 5.6% रह गया है, जो कि 2012 के बाद का सबसे निचला स्तर है। यह गिरावट ग्लोबल टेक्नोलॉजी बजट को लेकर चिंताएं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का पारंपरिक आउटसोर्सिंग मॉडल पर पड़ने वाले असर को दर्शाती है।
डेरिवेटिव्स में शॉर्ट पोजिशनिंग
मार्केट डेटा से पता चलता है कि प्रोफेशनल ट्रेडर्स ने बड़ी मात्रा में मंदी वाली पोजीशन (Bearish Bets) बना रखी हैं। कई प्रमुख IT स्टॉक्स में प्राइस करेक्शन के बावजूद फ्यूचर्स में ओपन इंटरेस्ट (Open Interest) अपने ऐतिहासिक उच्चतम स्तर पर है। उदाहरण के लिए, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में अब तक का सबसे अधिक फ्यूचर्स ओपन इंटरेस्ट देखा जा रहा है, जबकि विप्रो (Wipro) भी अपने ऐतिहासिक शिखर के करीब है।
ब्रोकरेज फर्मों के आंकड़ों के अनुसार, प्रमुख कंपनियों में ओपन इंटरेस्ट में भारी बढ़ोतरी हुई है: विप्रो में 78%, KPIT टेक्नोलॉजीज में 64%, एचसीएल टेक्नोलॉजीज में 61%, और इंफोसिस में 40% की साल-दर-साल बढ़ोतरी हुई है। मार्केट एनालिस्ट्स का मानना है कि जब भारी शॉर्ट पोजीशन मेजर टेक्निकल सपोर्ट लेवल के पास होती हैं, तो नतीजों के सीजन के दौरान किसी भी सकारात्मक खबर से ट्रेडर्स की पोजीशन क्लोज होने के कारण स्टॉक में तेज उछाल आ सकता है।
रिटेल निवेशकों की सतर्कता
खुदरा निवेशकों का सेंटिमेंट भी रक्षात्मक दिख रहा है। मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी (MTF) के इस्तेमाल के आंकड़ों से पता चलता है कि TCS के लिए फंडेड बुक में कमी आई है। जून के अंत में लगभग ₹1,675 करोड़ से घटकर जुलाई की शुरुआत में यह ₹1,555 करोड़ से ₹1,590 करोड़ के बीच आ गया। यह लगभग 7% की गिरावट दर्शाती है कि कुछ लेवरेज्ड निवेशक हालिया मामूली प्राइस रिकवरी के दौरान पोजीशन बढ़ाने के बजाय अपनी पोजीशन से बाहर निकलना पसंद कर रहे हैं, जो मौजूदा सतर्क माहौल को और मजबूत करता है।
नतीजों पर टिकी निगाहें
TCS ने पहले ही 8.5% का नेट प्रॉफिट ग्रोथ और 13.9% की साल-दर-साल रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि इसके प्रतिस्पर्धी कैसा प्रदर्शन करते हैं। इंफोसिस, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, विप्रो और LTIMindtree जैसी कंपनियां जून-तिमाही के नतीजे जारी करने वाली हैं। निवेशक डिस्क्रिशनरी खर्च (Discretionary Spending) और डील पाइपलाइन की सेहत पर विशिष्ट विवरणों की तलाश करेंगे। शेयरधारकों के लिए मुख्य जोखिम यह बना हुआ है कि क्या ग्लोबल डिमांड कमजोर रहती है, जिससे प्रॉफिट मार्जिन की रिकवरी में देरी हो सकती है। दूसरी ओर, विदेशी निवेशकों द्वारा वर्तमान में कम आवंटन और डेरिवेटिव्स में भारी मात्रा में मंदी को देखते हुए, यह सेक्टर नतीजों में किसी भी आश्चर्यजनक सुधार के प्रति संवेदनशील है। बाजार की आशंकाओं से थोड़ा भी बेहतर कमेंट्री स्टॉक की कीमतों को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकती है क्योंकि ट्रेडर्स अपनी पोजीशन एडजस्ट करेंगे।
