Indian IT Sector: फ्रेशर्स पर फोकस घटा, अनुभवी प्रोफेशनल्स की बढ़ी मांग! जानें क्या है वजह

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Indian IT Sector: फ्रेशर्स पर फोकस घटा, अनुभवी प्रोफेशनल्स की बढ़ी मांग! जानें क्या है वजह

भारतीय आईटी सेक्टर में हायरिंग का ट्रेंड बदल रहा है। फ्रेशर्स की जगह अब अनुभवी प्रोफेशनल्स को तरजीह दी जा रही है, जिससे एंट्री-लेवल हायरिंग में **10%** की गिरावट आई है। ऑटोमेशन और AI का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है।

हायरिंग में बड़ा बदलाव

भारतीय टेक्नोलॉजी जॉब मार्केट एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। पिछले एक साल में टेक प्रोफेशनल्स की मांग 10% बढ़ी है, लेकिन अब ट्रेडिशनल IT सेक्टर फ्रेश ग्रेजुएट्स को पहले की तरह हायर नहीं कर रहा है।

ताजा आंकड़ों के मुताबिक, IT इंडस्ट्री में फ्रेशर्स की हायरिंग पिछले साल के मुकाबले 32% से घटकर 24% रह गई है। यह दिखाता है कि कंपनियां अब एंट्री-लेवल पर स्टाफ बनाने की जगह अनुभवी प्रोफेशनल्स को प्राथमिकता दे रही हैं।

तुरंत प्रोडक्टिविटी पर फोकस

कंपनियां अब 'अनुभव पहले' (Experience-First) हायरिंग मॉडल की ओर बढ़ रही हैं। इसका मुख्य कारण है तुरंत काम शुरू करने की क्षमता। फ्रेश ग्रेजुएट्स को ट्रेनिंग देने में समय और पैसा लगता है, जबकि अनुभवी लोग आते ही प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू कर देते हैं।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल भी इस ट्रेंड को बढ़ावा दे रहा है। स्टडीज बताती हैं कि AI सिस्टम अब एंट्री-लेवल के 37% टेक्निकल कामों को संभाल सकते हैं। इसलिए, कंपनियां अब इन कामों के लिए ऑटोमेशन का इस्तेमाल कर रही हैं, जिससे ग्रेजुएट्स को बड़े पैमाने पर हायर करने की जरूरत कम हो गई है।

नॉन-टेक सेक्टर से मुकाबला

जब ट्रेडिशनल IT कंपनियां फ्रेशर्स की हायरिंग कम कर रही हैं, तो टेक टैलेंट को दूसरे सेक्टर्स जैसे बैंकिंग, मैन्युफैक्चरिंग, हेल्थकेयर और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) तेजी से हायर कर रहे हैं। ये कंपनियां अपने डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के लिए टेक प्रोफेशनल्स की तलाश में हैं।

यह टैलेंट का पुनर्वितरण (Redistribution) बताता है कि स्किल्ड कर्मचारियों के लिए लड़ाई अब सिर्फ IT सेक्टर तक सीमित नहीं है।

स्पेशलाइज्ड रोल्स का उदय

एंट्री-लेवल हायरिंग अब ज्यादा स्पेशलाइज्ड हो गई है। जनरल स्किल्स वाले लोगों को बड़ी संख्या में हायर करने का दौर खत्म हो रहा है। अब AI, साइबर सिक्योरिटी और डेटा साइंस जैसे खास स्किल्स की डिमांड है।

AI से जुड़े रोल्स में फ्रेशर्स की हायरिंग 1% से बढ़कर 4% हो गई है। हालांकि, इन एंट्री-लेवल पोजिशंस के लिए भी 2-3 साल का प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस मांगा जा रहा है, जिसे 'एक्सपीरियंस क्रीप' (Experience Creep) कहा जा रहा है।

इसके कारण सैलरी में भी फर्क आया है। जनरल रोल्स में सैलरी स्थिर है, वहीं हाई-डिमांड वाले स्पेशलाइज्ड फील्ड्स में प्रीमियम सैलरी पैकेज मिल रहे हैं।

निवेशकों के लिए ध्यान देने योग्य बातें

इस बदलाव के लॉन्ग-टर्म रिस्क भी हैं। फ्रेश टैलेंट में निवेश कम करने से इंडस्ट्री को भविष्य में मिड-लेवल लीडर्स की कमी का सामना करना पड़ सकता है। इससे अनुभवी स्टाफ के लिए वेज इन्फ्लेशन (Wage Inflation) बढ़ सकता है, क्योंकि कंपनियां कम टैलेंट पूल के लिए प्रतिस्पर्धा करेंगी।

इन्वेस्टर्स को मैनेजमेंट की कमेंट्री पर नजर रखनी चाहिए कि वे हायरिंग एफिशिएंसी और वर्कफोर्स कंपोजीशन को कैसे मैनेज कर रहे हैं। ऑटोमेशन से एंट्री-लेवल रोल्स को रिप्लेस करके प्रॉफिट मार्जिन बनाए रखने की क्षमता, या अनुभवी प्रोफेशनल्स को हायर करने की बढ़ी लागत से अर्निंग्स पर पड़ने वाले दबाव जैसे मेट्रिक्स को ट्रैक करना महत्वपूर्ण होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.