भारतीय IT सेक्टर के लिए आगे का रास्ता साफ है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और हाई-वैल्यू सर्विसेज की बदौलत इंडस्ट्री **FY27** तक **6%** की रेवेन्यू ग्रोथ बरकरार रख सकती है। हालांकि, अमेरिका और यूरोप पर निर्भरता के साथ मार्जिन का दबाव अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
भारतीय आईटी सेक्टर अब एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। पारंपरिक कॉन्ट्रैक्ट्स की जगह अब हाई-वैल्यू, AI-पावर्ड सर्विसेज ले रही हैं। Brickwork Ratings की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, इंडस्ट्री FY27 तक 6% की स्थिर रेवेन्यू ग्रोथ दर हासिल कर सकती है। यह अनुमान काफी अहम है, खासकर तब जब सेक्टर ने FY26 में $418 बिलियन का सर्विस एक्सपोर्ट दर्ज किया हो।
AI और GCC का दबदबा
सेक्टर खुद को हाइपर-ऑटोमेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अनुकूल ढाल रहा है। इस ग्रोथ में 'ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स' (GCCs) की भूमिका सबसे बड़ी है। भारत में अभी 1,700 से ज्यादा GCCs काम कर रहे हैं और यह सेगमेंट 20% से ज्यादा की सालाना दर से बढ़ रहा है। सरकारी स्तर पर AI इंफ्रास्ट्रक्चर और GPUs पर फोकस होने से कंपनियों को अब ज्यादा जटिल प्रोजेक्ट्स पर काम करने में मदद मिल रही है।
मार्जिन रिकवरी की उम्मीद
शेयरधारकों के लिए मार्जिन का मुद्दा सबसे हॉट टॉपिक है। FY25 में ऑपरेटिंग मार्जिन घटकर 20.1% पर आ गया था, जिसकी मुख्य वजह सैलरी में बढ़ोतरी और AI एक्सपर्ट्स की महंगी हायरिंग थी। हालांकि, अब अनुमान है कि ऑटोमेशन के जरिए कंपनियां FY27 तक मार्जिन को 21.8% तक वापस ले जा सकती हैं।
रिस्क और मार्केट का गणित
ग्रोथ का आउटलुक पॉजिटिव जरूर है, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं। सेक्टर का करीब 85.7% रेवेन्यू अमेरिका और यूरोप से आता है। वहां अगर इकोनॉमी सुस्त होती है या टेक स्पेंडिंग घटती है, तो भारतीय कंपनियों पर सीधा असर पड़ सकता है। फिलहाल लार्ज-कैप आईटी कंपनियां धीमी ग्रोथ दिखा रही हैं, जबकि मिड-टियर फर्म्स में बेहतर मोमेंटम दिख रहा है।
निवेशकों के लिए जरूरी बातें
आगे चलकर यह देखना दिलचस्प होगा कि कंपनियां अपनी डील विनिंग को कितनी जल्दी रेवेन्यू में बदल पाती हैं। क्या वे स्किल्स की कमी को पूरा कर पाएंगी और मार्जिन के दबाव को झेलते हुए AI में निवेश जारी रख पाएंगी? अगले 2 साल आईटी स्टॉक्स के लिए बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं।
