भारतीय आईटी सेक्टर में हायरिंग (Hiring) के संकेत स्थिर हो रहे हैं। Q1 2026 में कुल 5,948 कर्मचारियों की बढ़ोतरी हुई, लेकिन इसका बड़ा श्रेय TCS को जाता है। बाकी बड़ी कंपनियां अभी भी कर्मचारियों की छंटनी कर रही हैं, हालांकि अट्रीशन रेट (Attrition Rate) घट रहा है।
आईटी सेक्टर में हायरिंग की नई चाल
जुलाई 2026 तक, भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (IT) सेक्टर में हायरिंग के रुझान में स्थिरता के शुरुआती संकेत दिख रहे हैं। हालिया तिमाही नतीजों के अनुसार, भले ही पूरी इंडस्ट्री अभी बड़े पैमाने पर हायरिंग पर वापस नहीं आई है, लेकिन कर्मचारियों की संख्या में आई तेज गिरावट अब कम होती दिख रही है।
मिश्रित रुझान: कहीं बढ़ोतरी, कहीं कटौती
कुल मिलाकर, सेक्टर में 5,948 कर्मचारियों की शुद्ध बढ़ोतरी हुई है, जो कि 0.5% की मामूली वृद्धि है। लेकिन, यह आंकड़ा काफी हद तक टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की वजह से बढ़ा है, जिसने जून तिमाही में 9,000 से ज्यादा नए कर्मचारी जोड़े। यह करीब 4 साल में TCS की सबसे बड़ी हायरिंग है। अगर TCS को हटा दें, तो बाकी बड़ी आईटी कंपनियों की कुल कर्मचारी संख्या में गिरावट ही दर्ज की गई। यह दिखाता है कि कई कंपनियां अभी भी अपनी वर्कफोर्स को मौजूदा रेवेन्यू डिमांड के हिसाब से एडजस्ट कर रही हैं।
कर्मचारियों की संख्या के अलावा, इंडस्ट्री में अट्रीशन रेट (Attrition Rate) में लगातार गिरावट देखी गई है। यह बेहतर एम्प्लॉई रिटेंशन (Employee Retention) का संकेत है और पिछले दो सालों में चल रही तेज सैलरी हाइक (Salary Hike) के माहौल के ठंडा होने का भी। टेक महिंद्रा (Tech Mahindra) ने बताया कि उनका सालाना अट्रीशन 12.6% से घटकर 11.8% हो गया, वहीं विप्रो (Wipro) का रेट 15.1% से सुधरकर 13.9% पर आ गया।
प्रिसिजन हायरिंग पर फोकस
टेक महिंद्रा जैसी कंपनियों में कैंपस हायरिंग (Campus Hiring) के लौटने के बावजूद, एक्सपर्ट्स आईटी कंपनियों की टीम बनाने के तरीके में एक बड़े बदलाव पर जोर दे रहे हैं। कंपनियां अब बड़े पैमाने पर हायरिंग के बजाय 'प्रिसिजन हायरिंग' (Precision Hiring) पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। इसका मतलब है कि वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा आर्किटेक्चर (Data Architecture), क्लाउड कंप्यूटिंग (Cloud Computing) और साइबर सिक्योरिटी (Cybersecurity) जैसे खास और डिमांड वाले स्किल्स (Skills) पर भर्ती कर रही हैं।
इस बदलाव का एक कारण ऑटोमेशन (Automation) और AI का बढ़ता इस्तेमाल है, जिससे एंट्री-लेवल (Entry-Level) मैनुअल टेस्टर्स और रूटीन सपोर्ट स्टाफ की जरूरत कम हो गई है। डेटा बताता है कि एंट्री-लेवल की नौकरियों में साल-दर-साल काफी कमी आई है, क्योंकि कंपनियां ऐसे कैंडिडेट्स को प्राथमिकता दे रही हैं जो डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन (Digital Transformation) प्रोजेक्ट्स में तुरंत योगदान कर सकें या AI सिस्टम के लिए गवर्नेंस प्रदान कर सकें। इसी बीच, ग्लोबल कैप्टिव सेंटर्स (Global Captive Centers) यानी बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों के इन-हाउस आईटी यूनिट्स भी प्रतिभाओं को आकर्षित कर रहे हैं, जिससे थर्ड-पार्टी आईटी सर्विस प्रोवाइडर्स पर लीन (Lean) और हाई-प्रोडक्टिविटी (High-Productivity) टीमों को बनाए रखने का दबाव बढ़ रहा है।
निवेशकों के लिए खास बातें
निवेशकों के लिए, मुख्य ध्यान रेवेन्यू ग्रोथ (Revenue Growth) और हेडकाउंट एक्सपेंशन (Headcount Expansion) के बीच संतुलन बनाए रखना है। जैसे-जैसे कंपनियां कमजोर खर्च और प्रतिस्पर्धी प्राइसिंग प्रेशर (Pricing Pressure) के बीच अपने प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margin) को बचाने की कोशिश कर रही हैं, कुल हेडकाउंट स्थिर रह सकता है, भले ही रेवेन्यू बढ़े। निवेशकों को यह देखना होगा कि क्या कंपनियां मौजूदा सावधानी-आधारित हायरिंग मॉडल से व्यापक वृद्धि की ओर सफलतापूर्वक बढ़ पाती हैं, खासकर AI और डिजिटल इंजीनियरिंग सेवाओं की बढ़ती मांग के साथ। आने वाली तिमाही रिपोर्टें स्पष्ट करेंगी कि क्या TCS जैसे लीडर्स में हायरिंग में हुआ यह मामूली सुधार, मिड-कैप और लार्ज-कैप आईटी सर्विसेज सेगमेंट के लिए एक व्यापक, टिकाऊ टर्नअराउंड (Turnaround) का संकेत है।
