भारतीय आईटी सेक्टर में पे-स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। नई इंडस्ट्री रिपोर्ट के मुताबिक, अब स्पेशलाइज्ड AI और क्लाउड एक्सपर्ट्स को सालाना **₹1 करोड़** से ज्यादा का पैकेज मिल रहा है, जबकि ट्रेडिशनल आईटी जॉब्स में सैलरी ग्रोथ रुकी हुई है।
भारत के विशाल आईटी सेक्टर में अब पुराना सैलरी मॉडल पूरी तरह बदल रहा है। TeamLease Digital की एक रिपोर्ट के अनुसार, जहां मास रिक्रूटमेंट की रफ्तार धीमी हुई है, वहीं AI, डेटा और क्लाउड स्किल्स वाले प्रोफेशनल्स की भारी मांग ने सैलरी के नए मानक तय कर दिए हैं। अब कंपनियां उन लोगों को प्रॉयोरिटी दे रही हैं जो आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस को सीधे बिजनेस इंफ्रास्ट्रक्चर में ढाल सकते हैं।
AI स्किल्स का प्रीमियम
फिलहाल AI आर्किटेक्ट्स सैलरी चार्ट में टॉप पर हैं और उनका सालाना पैकेज ₹1 करोड़ के आंकड़े को पार कर चुका है। वहीं, इंडस्ट्रियल डेटा आर्किटेक्चर और ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी सिक्योरिटी जैसे रोल्स में भी प्रोफेशनल्स ₹95 लाख तक कमा रहे हैं। यह उन एंट्री-लेवल या रूटीन आईटी जॉब्स से बिल्कुल अलग है जहां सैलरी ग्रोथ अब पूरी तरह थम सी गई है।
टैलेंट का नया ठिकाना
महंगी स्किल्स की जंग अब बेंगलुरु या हैदराबाद जैसे ट्रेडिशनल आईटी हब तक सीमित नहीं है। टैलेंट की कमी के चलते टियर-2 शहरों में भी GenAI इंजीनियर्स को मेट्रो शहरों के ट्रेडिशनल प्रोफेशनल्स से ज्यादा पैकेज मिल रहा है। फिलहाल भारत के आईटी वर्कफोर्स में सिर्फ 16% लोग ही ऐसे हैं जो AI प्रोजेक्ट्स को पायलट फेस से प्रोडक्शन स्टेज तक ले जाने का हुनर रखते हैं।
कंपनियों के मार्जिन पर असर
आईटी शेयरों में निवेश करने वालों के लिए यह स्थिति अवसर और दबाव दोनों लेकर आई है। TCS, Infosys, HCLTech और Wipro जैसी कंपनियां अपनी मौजूदा टीम को अपस्किल करने पर भारी निवेश कर रही हैं। निवेशकों के लिए अब सबसे जरूरी यह देखना होगा कि कंपनियां अपनी ऑपरेटिंग मार्जिन को बचाते हुए इस स्किल गैप को कैसे भरती हैं।
भविष्य का जोखिम
जो लोग मैनुअल टेस्टिंग या बेसिक प्रोसेस पर काम कर रहे हैं, उनके लिए खतरा बढ़ रहा है क्योंकि ऑटोमेशन अब इन कामों को तेजी से रिप्लेस कर रहा है। आने वाले समय में कंपनियों के क्वार्टरली नतीजों पर नजर रखना जरूरी होगा, क्योंकि हाई-वैल्यू टैलेंट की बढ़ती कॉस्ट का असर मार्जिन पर पड़ना तय है।
