Indian IT Q2 Results: AI की दम पर TCS, HCLTech चमके, Wipro की रफ्तार सुस्त

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AuthorMehul Desai|Published at:
Indian IT Q2 Results: AI की दम पर TCS, HCLTech चमके, Wipro की रफ्तार सुस्त

सितंबर तिमाही के नतीजों में भारतीय IT कंपनियों का मिला-जुला प्रदर्शन देखने को मिला है। AI से होने वाली कमाई ने पारंपरिक बिजनेस की सुस्ती को संभाला है, लेकिन कंपनियों के बीच बढ़ता परफॉरमेंस गैप निवेशकों के लिए चिंता का विषय है।

सितंबर तिमाही के नतीजे यह साफ कर रहे हैं कि भारतीय IT सेक्टर एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। मार्केट में लंबे समय से यह बहस थी कि क्या जेनेरेटिव AI पारंपरिक सर्विस मॉडल को खत्म कर देगा या विकास का नया इंजन बनेगा? अब डेटा यह दिखा रहा है कि जो कंपनियां AI-नेटिव सर्विसेज को अपनाने में सफल रही हैं, वे उन कंपनियों से बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं जो अभी भी पुराने कॉन्ट्रैक्ट्स पर टिकी हैं।

AI है असली ग्रोथ ड्राइवर

तिमाही के आंकड़े बताते हैं कि AI अब सिर्फ चर्चा का विषय नहीं रहा, बल्कि रेवेन्यू का हिस्सा बन चुका है। Tata Consultancy Services (TCS) ने रिपोर्ट दी है कि उनकी कुल कमाई में AI-रिलेटेड इनकम का हिस्सा 10% के पार निकल गया है। इसी तरह HCL Technologies और Tech Mahindra ने भी अपने एडवांस्ड AI प्रोजेक्ट्स में जोरदार ग्रोथ दिखाई है। निवेशकों के लिए यह एक संकेत है कि ये दिग्गज कंपनियां अब केवल सॉफ्टवेयर मेंटेनेंस से आगे बढ़कर हाई-वैल्यू डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की ओर शिफ्ट हो गई हैं, जहां प्रॉफिट मार्जिन बेहतर होते हैं।

प्रदर्शन में बढ़ती खाई

सेक्टर की सभी कंपनियां एक साथ नहीं दौड़ रही हैं। Wipro और LTIMindtree के नतीजे बाजार की उम्मीदों से काफी कमजोर रहे हैं। Wipro का मैनेजमेंट दिसंबर तिमाही के लिए काफी सतर्क दिखा और उन्होंने कांस्टेंट करेंसी ग्रोथ -1.5% से 0.5% के बीच रहने का अनुमान जताया है। यह साफ दिखाता है कि कंपनी-दर-कंपनी के परफॉरमेंस में अब जमीन-आसमान का फर्क आ गया है।

पुराने बिजनेस पर दबाव

आईटी सेक्टर के लिए सबसे बड़ी चुनौती लेगेसी (पुराने) बिजनेस की प्राइजिंग है। लंबे समय से चल रहे सॉफ्टवेयर सपोर्ट और मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट्स पर तगड़ा कॉम्पिटिशन है। कंपनियां इन पुराने रेवेन्यू सोर्स को बचाने और नई AI सर्विसेज के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही हैं। यदि कंपनियां पुराने रेवेन्यू को AI के ऊंचे मार्जिन वाले काम से रिप्लेस नहीं कर पाईं, तो प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बना रह सकता है।

निवेशकों को क्या देखना चाहिए?

आने वाली तिमाहियों के लिए 'हेडकाउंट' यानी कर्मचारियों की संख्या एक बड़ा इंडिकेटर हो सकती है। ज्यादातर बड़ी IT कंपनियों ने सितंबर तिमाही में हायरिंग बढ़ाई है, जो मैनेजमेंट के आत्मविश्वास को दर्शाती है। यह संकेत है कि उन्हें निकट भविष्य में काम बढ़ने की उम्मीद है। निवेशकों को यह देखना होगा कि क्या यह हायरिंग का सिलसिला आगे भी जारी रहता है, क्योंकि यही सेक्टर की सुस्ती खत्म होने का पहला संकेत होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.